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”शिक्षा में संस्कार, नैतिकता और भारतीय मूल्य जरूरी”

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”शिक्षा में संस्कार, नैतिकता और भारतीय मूल्य जरूरी”

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गुरुकुल से एआई तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
उदयपुर, 11 मई:
राजस्थान विद्यापीठ एवं निर्मला कॉलेज ऑफ एजुकेशन, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “गुरुकुल से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें शिक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, नैतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक के संतुलन पर विचार रखे।
राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय वैदिक शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन और व्यवहारिक शिक्षा पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि आज एआई और मशीन लर्निंग के दौर में भी भारतीय ज्ञान परंपरा प्रासंगिक बनी हुई है।
कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि तकनीक ने कार्यप्रणाली को आसान बनाया है, लेकिन शिक्षा में संस्कार और नैतिकता का महत्व आज भी सर्वोपरि है। संगोष्ठी में देशभर से करीब 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

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