माइनिंग लीज के विरोध में ग्रामीण एकजुट
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ग्रामीण बोले- खनन हुआ तो खत्म हो जाएंगे तालाब, चारागाह और हजारों पेड़
चित्तौड़गढ़, 12 मई: चित्तौड़गढ़ जिले की भदेसर तहसील के सुखवाड़ा, हसमतगंज, वजीरगंज और गणपत खेड़ा गांवों में प्रस्तावित माइनिंग लीज को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिलानाम जमीन पर खनन शुरू हुआ तो क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा। लोगों ने जिला प्रशासन से माइनिंग लीज रद्द करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि खनन शुरू हुआ तो वे आंदोलन और चुनाव बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों के अनुसार जिस क्षेत्र में खनन प्रस्तावित है वहां पहाड़ियां, तालाब, तलाई, एनीकट और वाटरशेड योजना के तहत विकसित हरित क्षेत्र मौजूद हैं। इसके अलावा यहां सैकड़ों बीघा चारागाह भूमि है, जहां आसपास के गांवों के मवेशी चरने आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन शुरू होने पर हजारों पेड़ काटे जाएंगे और धूल-मिट्टी से खेती भी प्रभावित होगी।
लोगों ने बताया कि क्षेत्र में खेजड़ी, बबूल सहित कई उपयोगी वृक्ष मौजूद हैं। खेजड़ी राजस्थान का राजकीय वृक्ष है, जिसे बचाना जरूरी है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहाड़ियों में खनन होने से तालाबों के जल स्रोत प्रभावित होंगे और पूरे इलाके में पानी का संकट गहरा सकता है।
माइनिंग लीज का विरोध का प्रस्ताव पारित
25 अप्रैल को हुई ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से माइनिंग लीज का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किया था। बाद में गांवों की बैठक में भी खनन नहीं होने देने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
