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विदेशी गिफ्ट का झांसा देकर महिला से 23 लाख की साइबर ठगी

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विदेशी गिफ्ट का झांसा देकर महिला से 23 लाख की साइबर ठगी

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सोना-चांदी और विदेशी करेंसी का लालच देकर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, साइबर थाना जांच में जुटा
उदयपुर, 21 जुलाई:
उदयपुर जिले के वल्लभनगर क्षेत्र की एक महिला से विदेशी गिफ्ट भेजने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 23.28 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने अलग-अलग मोबाइल और इंटरनेशनल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल कर महिला को सोना-चांदी और विदेशी करेंसी का पार्सल भेजने का लालच दिया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, कस्टम क्लियरेंस और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम जमा करवा ली।
वल्लभनगर के पिपली चौक निवासी भूरी देवी (38) पत्नी प्रकाश लोहार ने साइबर थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि 28 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच उसने अपने खाते से करीब 7.74 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर लगभग 15.50 लाख रुपए भी ठगों के बताए खातों में जमा करा दिए। बाद में सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, तब महिला को ठगी का अहसास हुआ।
साइबर थाना डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि मामले में जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। कॉल करने वाले मोबाइल और इंटरनेशनल नंबरों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, विदेशी गिफ्ट या लॉटरी के लालच में आकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर न करें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें।

160 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड उदयपुर में छिपा बैठा था

दुबई से चला रखा था साइबर ठग गिरोह, नेपाल-भूटान के रास्ते भारत लौटा आरोपी, 450 बैंक खातों के जरिए देशभर में फैला था साइबर फ्रॉड नेटवर्क
डूंगरपुर, 21 जुलाई:
डूंगरपुर पुलिस ने 160 करोड़ रुपए की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना घनश्याम कलाल को गिरफ्तार किया है। सीमलवाड़ा निवासी आरोपी दुबई से नेपाल और भूटान के रास्ते भारत लौटा था। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मुखबिर की सूचना के आधार पर उसे उदयपुर के बलीचा क्षेत्र से दबोच लिया।
पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि आरोपी भोले-भाले ग्रामीणों और विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पैन कार्ड, बैंक खाता और लोन दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर 450 से अधिक बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल सिम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी अपने कब्जे में लेकर इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था। जांच में इन खातों के जरिए 160 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क दुबई, कुवैत और जॉर्जिया से संचालित होता था तथा सदस्य टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क में रहते थे। ठगी की रकम एटीएम और चेक के जरिए निकालकर कमीशन के आधार पर बांटी जाती थी। इस मामले में पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब मुख्य सरगना से पूछताछ कर विदेश में बैठे नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, पीड़ितों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

शौर्य फाउंडेशन के फाउंडर और एजेंटों पर कार्रवाई की मांग, डेढ़-डेढ़ लाख रुपए लेकर न मानदेय दिया, न रकम लौटाई
उदयपुर, 21 जुलाई: बांसवाड़ा के बाद अब डूंगरपुर जिले में भी शौर्य फाउंडेशन पर सरकारी स्कूलों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए की ठगी करने के आरोप लगे हैं। मंगलवार को पीड़ित अभ्यर्थियों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए फाउंडेशन के फाउंडर और एजेंटों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पीड़ितों ने बताया कि वर्ष 2024 में शौर्य फाउंडेशन ने सरकारी स्कूलों में नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 1.50 लाख रुपए जमा कराए गए और नियुक्ति आदेश भी दिए गए। अभ्यर्थियों ने संबंधित स्कूलों में तीन से चार महीने तक सेवाएं भी दीं, लेकिन उन्हें वादा किए गए 12,700 रुपए प्रतिमाह मानदेय का एक भी भुगतान नहीं किया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि मानदेय नहीं मिलने पर उन्होंने काम बंद कर दिया और अपनी जमा राशि लौटाने की मांग की, लेकिन फाउंडेशन और उसके एजेंट लगातार एक-एक माह का समय देकर टालमटोल करते रहे। भरोसा दिलाने के लिए एक खाली चेक भी दिया गया, लेकिन बैंक में खाते में पर्याप्त राशि नहीं मिली। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो जमा राशि वापस मिली और न ही बकाया मानदेय का भुगतान हुआ।

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