सांसारिक चिंता जीव को प्रभु से दूर करती है : रासेश्वरी देवी जी
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श्रीमद्भागवत महापुराण को बताया दुखों से मुक्ति देने वाला “व्यावहारिक विज्ञान”
उदयपुर, 18 मई : हिरणमगरी सेक्टर-13 स्थित आशीष वाटिका में ब्रज गोपिका सेवा मिशन के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य महोत्सव के दूसरे दिन जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका Raseshwari Devi ने आध्यात्मिक जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। दीप प्रज्वलन और भागवत आरती के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
व्यासपीठ से संबोधित करते हुए रासेश्वरी देवी जी ने कहा कि सांसारिक चिंता जीव को ईश्वर से दूर करती है, जबकि पारमार्थिक चिंता प्रभु के समीप ले जाती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत को दुखों को जड़ से मिटाने वाला “अचूक व्यावहारिक मैनुअल” बताते हुए कहा कि यह केवल कथा नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का मार्ग है।
उन्होंने औषधि और रसायन का उदाहरण देते हुए कहा कि औषधि रोग दूर करती है, जबकि रसायन व्यक्ति को रोगों से बचाने की क्षमता देता है। इसी प्रकार भागवत कथा मनुष्य को सांसारिक विकारों से दूर रखती है। देवी जी ने राजा परीक्षित और देवताओं के अमृत प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि देवताओं का अमृत केवल लंबी आयु देता है, जबकि भागवत का कथा-अमृत जीव को निर्भय और दिव्य बनाता है।
कार्यक्रम के अंत में उनके मधुर संकीर्तन “श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा…” से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। महाआरती के दौरान शंख और करतल ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रवचन श्रृंखला प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे तक 25 मई तक जारी रहेगी।
