हाथ-पैरों ने साथ नहीं दिया, हौसलों ने दिलाई 100% सफलता
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सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे लक्षित ने RBSE 10वीं दिव्यांग वर्ग में हासिल किए पूरे अंक, पिता गोद में उठाकर स्कूल ले जाते थे
उदयपुर, 17 अप्रैल: शारीरिक अक्षमता यदि हौसलों के आगे छोटी पड़ जाए तो सफलता की नई मिसालें बनती हैं। उदयपुर के 18 वर्षीय लक्षित परमार ने यही साबित कर दिखाया है। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित लक्षित अपने हाथ-पैरों से कोई काम नहीं कर पाता, खुद का नाम तक नहीं लिख सकता, लेकिन RBSE 10वीं की दिव्यांग श्रेणी में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर उसने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया।
पुरोहितों की मादड़ी निवासी लक्षित को चलने-फिरने और बैठने में दिक्कत होती है। वह अधिक देर तक बैठ भी नहीं सकता, इसलिए लेटे-लेटे पढ़ाई करता था। परीक्षा में बोर्ड नियमों के अनुसार उसे राइटर की सुविधा मिली, जिसने उसकी उत्तर पुस्तिका लिखी। गुरुवार को रिजल्ट घोषित होते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटे की उपलब्धि पर पिता दिनेश कुमार परमार भावुक हो उठे।
दिनेश कुमार ने बताया कि परिवार के कई लोग बेटे की शारीरिक स्थिति पर सवाल उठाते थे, लेकिन लक्षित ने अपनी मेहनत से सबको जवाब दे दिया। वे रोज बेटे को गोद में उठाकर स्कूल ले जाते थे और उसके हर छोटे-बड़े काम में मदद करते थे। अब वही लोग फोन कर बधाई दे रहे हैं।
लक्षित का मंत्र: लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए
लक्षित ने बताया कि वह रोज 3 से 4 घंटे पढ़ाई करता था और सभी विषयों को बराबर समय देता था। विज्ञान उसका पसंदीदा विषय है, जबकि दर्शनशास्त्र पढ़ने में भी उसे रुचि है। वह ज्यादातर ऑनलाइन पढ़ाई करता था और लेटे-लेटे ही किताबों तथा मोबाइल से पढ़ाई जारी रखता था। लक्षित का कहना है कि जीवन में हर किसी के सामने चुनौतियां होती हैं, इसलिए परेशानियों पर नहीं बल्कि अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। उसका सपना सिविल सर्विसेज में जाकर कलेक्टर बनने का है।
परिवार ने कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया
माता रेखा परमार ने बताया कि बचपन से ही लक्षित को मूवमेंट में दिक्कत थी। कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन बीमारी का समाधान नहीं मिल सका। बावजूद इसके परिवार ने उसे कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया। उसकी दो छोटी बहनें भी हर काम में उसका साथ देती हैं। स्कूल की शिक्षिका निर्मला सालवी के अनुसार लक्षित बेहद जिज्ञासु और तेज दिमाग का छात्र है। वह एक बार पढ़ी हुई चीज जल्दी याद कर लेता है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार 100 प्रतिशत अंक का परिणाम पूरे विद्यालय के लिए गर्व का विषय है।
