बीएपी के गढ़ चौरासी में सीएम साधेंगे आदिवासी समीकरण
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भजनलाल की चौपाल आज; आमजन से सीधा संवाद कर, सांसद राजकुमार रोत के ‘होम ग्राउंड’ धंबोला में रात्रि विश्राम,
डूंगरपुर, 20 मई(जुगल कलाल) सूबे के मुखिया भजनलाल शर्मा आज से दो दिवसीय डूंगरपुर दौरे पर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक जनसुनवाई भर नहीं है, बल्कि इसे भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सबसे मजबूत गढ़ ‘चौरासी विधानसभा’ को भीतर से भेदने की एक बड़ी राजनीतिक पटकथा के रूप में देखा जा रहा है। सीएम शर्मा आज सीधे बीएपी के सबसे बड़े चेहरे और सांसद राजकुमार रोत के गृह क्षेत्र धंबोला चौरासी विधानसभा में एंट्री करेंगे। वे यहाँ न केवल सरकार चलाएंगे, राजनीति का तापमान भी नापेंगे। दरअसल, चौरासी विधानसभा क्षेत्र को देश स्तर पर आदिवासियों की राजनीति करने वाले सांसद राजकुमार रोत का अभेद्य किला माना जाता है। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनावों ने यहाँ के सियासी समीकरणों को बदल दिया है। बीजेपी अब इसी कमजोर नस को पकड़कर आगामी चुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर कलेक्ट्रेट से लेकर धंबोला तक प्रशासनिक अमला और बीजेपी संगठन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
दिल्ली तक गूंज रही आदिवासी राजनीति, अब ‘चौपाल’ के जरिए मिजाज बदलने का प्लान
बीजेपी ने चौरासी विधानसभा में बीएपी के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की है। विधानसभा चुनाव और उपचुनाव के आंकड़ों का गणित बात करे तो विधानसभा चुनाव 2023: बीएपी के राजकुमार रोत यहाँ से करीब 69,000 भारी मतों के अंतर से जीते थे।
उपचुनाव: रोत के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में बीएपी के अनिल कटारा तो जीते, लेकिन जीत का मार्जिन सिमटकर महज 20,000 वोटों पर आ गया। बीजेपी यहाँ दूसरे नंबर पर रही और इसी घटते मार्जिन ने बीजेपी के हौसले बुलंद कर दिए हैं। सांसद राजकुमार रोत इस वक्त दिल्ली से लेकर राजस्थान तक आदिवासियों के नाम पर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। ऐसे में सूबे के मुख्यमंत्री का सीधे उनके ‘होम ग्राउंड’ के गांव में जाकर ठहरना, आदिवासियों के बीच बैठना और उनकी समस्याएं सुनना बीएपी के लिए एक बड़ा अलार्म है। देखना होगा कि सीएम की यह ‘चौपाल’ वागड़ का मिजाज बदलने में कितनी कामयाब होती है।
सुलग रहा वागड़; क्या बिजली कटौती के गुस्से को शांत कर पाएंगे सीएम?
पिछले एक महीने से डूंगरपुर जिला अघोषित बिजली कटौती से बुरी तरह जूझ रहा है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीएपी लगातार सत्तापक्ष पर हमलावर हैं और जनता में भारी नाराजगी है। बिजली विभाग के सूत्रों के मुताबिक, कटौती की असली वजह सिस्टम पर बढ़ता ‘आंतरिक लोड’ है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि वागड़ के इस पावर क्राइसिस का एकमात्र स्थाई समाधान यहाँ 440 केवी का जीएसएस (GSS) बनाना है, ताकि सुचारू रूप से बिजली की सप्लाई हो सके।
मिनट-टू-मिनट: कलेक्ट्रेट में समीक्षा से लेकर सुबह की ‘मॉर्निंग वॉक’ तक
शाम 3.30 से 5.30 बजे : मुख्यमंत्री डूंगरपुर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। यहाँ जिला स्तरीय अधिकारियों की मैराथन बैठक लेंगे। पेंडिंग पड़े विकास कार्यों और बिजली-पानी के संकट और अन्य मुद्दों पर अधिकारियों की बैठक लगे।
रात 6.45 से 9.30 बजे: सीएम सीधे धंबोला के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए रवाना होंगे। वहाँ ग्रामीणों के बीच ‘रात्रि चौपाल’ सजेगी, जहाँ सीधे परिवादियों से संवाद कर समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निस्तारण किया जाएगा।
रात 10:00 बजे: राजनीति की कड़वाहट को भुलाकर सीएम एक स्थानीय गरीब आदिवासी परिवार के घर भोजन करेंगे और रात्रि विश्राम भी वहीं करेंगे।
अगली सुबह 6 से 9: सुबह बिना किसी तामझाम और भारी सुरक्षा लवाजमे के सीएम धंबोला की सड़कों पर मॉर्निंग वॉक के लिए निकलेंगे। इस दौरान वे रास्ते में मिलने वाले आम लोगों से सरकार के कामकाज का सीधा फीडबैक लेंगे।
