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इतिहास के अकादमिक षड्यंत्रों को ध्वस्त करना जरूरी : प्रो. डागा

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इतिहास के अकादमिक षड्यंत्रों को ध्वस्त करना जरूरी : प्रो. डागा

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सौंध माटी योजना कार्यशाला के समापन में बोले वक्ता, जनजातीय इतिहास के सही दस्तावेजीकरण पर जोर
उदयपुर, 22 मई:
सुखाड़िया विश्वविद्यालय और माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “जनजाति आस्था स्थल” विषयक कार्यशाला के समापन समारोह में प्रो. डागा ने कहा कि आज का दौर शस्त्र से अधिक शास्त्र का है, जहां वास्तविक युद्ध सीमाओं पर नहीं बल्कि लोगों के मस्तिष्क में लड़ा जा रहा है। उन्होंने इतिहास में राष्ट्र की अस्मिता के विरुद्ध रचे गए “अकादमिक षड्यंत्रों” को ध्वस्त करने की आवश्यकता बताई।
प्रो. डागा ने आर्यों के आगमन, राम मंदिर और कश्मीर विवाद जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैचारिक पूर्वाग्रहों के आधार पर झूठे नैरेटिव गढ़े गए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही इतिहास और राष्ट्र की वास्तविक छवि प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम बताया।
मुख्य वक्ता सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक परंपराएं सनातन संस्कृति से गहराई से जुड़ी हैं, लेकिन उनका गौरवशाली इतिहास सही रूप में सामने नहीं आ पाया। टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन ने “सौंध माटी योजना” को जनजातीय इतिहास और कला के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम में प्रो. नीरज शर्मा, डॉ. बालूदान बारहठ, डॉ. विनीता राजपुरोहित सहित कई विद्वानों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

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