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महाराणा प्रताप विश्व के लिए प्रेरणा के दीप: शांतिपीठ संगोष्ठी में वक्ताओं के विचार

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महाराणा प्रताप विश्व के लिए प्रेरणा के दीप: शांतिपीठ संगोष्ठी में वक्ताओं के विचार

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हल्दीघाटी को मूल स्वरूप में संरक्षित रखने और पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
उदयपुर, 16 जून:
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर शांतिपीठ संस्थान के तत्वावधान में आयोजित हल्दीघाटी यात्रा एवं संगोष्ठी में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप को विश्वभर के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए उनके आदर्शों को वर्तमान समय में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और स्वाभिमान की भावना को महाराणा प्रताप के जीवन से जोड़ते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने की बात कही गई।
मुख्य वक्ता इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ या भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के स्वतंत्रता-प्रिय लोगों के लिए आदर्श हैं। उनका जीवन पराक्रम, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा की अमिट मिसाल है। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने भी महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व का सम्मान किया और उनका संघर्ष आज भी प्रेरणा देता है।
शांतिपीठ संस्थान के संस्थापक अनंत गणेश त्रिवेदी ने कहा कि हल्दीघाटी केवल युद्धभूमि नहीं, बल्कि प्रेरणा, चिंतन और मानवीय मूल्यों की भूमि है। उन्होंने लोगों से अपने भीतर के ‘प्रताप’ को जागृत कर समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व निभाने का आह्वान किया।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कोठारी ने महाराणा प्रताप को सामाजिक अभियांत्रिकी का कुशल सूत्रधार बताते हुए कहा कि उन्होंने सहिष्णुता, मैत्री और सामुदायिक एकता को नई दिशा दी। वहीं प्रो. कमल सिंह राठौड़ ने हल्दीघाटी क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कवि लक्ष्मण पुरी गोस्वामी ने महाराणा प्रताप के चरित्र का काव्यात्मक वर्णन करते हुए उन्हें प्रेरणाओं का पुंज बताया। एडवोकेट उमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हल्दीघाटी और उसके वीर योद्धा आज भी समाज के लिए आदर्श हैं तथा यह मेवाड़ का सौभाग्य है कि देश ने सदैव मेवाड़ के नेतृत्व पर विश्वास किया।
कार्यक्रम में शांति लाल डागरेचा ने हल्दीघाटी एवं आसपास के ऐतिहासिक स्थलों का परिचय कराया। उपस्थित सभी लोगों ने हल्दीघाटी के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में कैलाश पालीवाल ने आभार व्यक्त किया।

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