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ईडर-मेवाड़ गठबंधन ने मुगलों की राह रोकी, महाराणा प्रताप का संघर्ष था सामूहिक प्रतिरोध: डॉ. जे.के.

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ईडर-मेवाड़ गठबंधन ने मुगलों की राह रोकी, महाराणा प्रताप का संघर्ष था सामूहिक प्रतिरोध: डॉ. जे.के.

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गुजरात के ईडर में संगोष्ठी, इतिहासकारों ने महाराणा प्रताप और ईडर राज्य के संबंधों पर डाला प्रकाश
उदयपुर, 19 जून:
महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल व्यक्तिगत या मेवाड़ तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सम्पूर्ण राजपूताना की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा का सामूहिक अभियान था। यह बात वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. जे.के. ओझा ने गुजरात के ईडर में आयोजित संगोष्ठी में कही।
ग्लोबल हिस्ट्री फोरम एवं एस.एस. मेहता कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी ‘‘महाराणा प्रताप और ईडर राज्य: शौर्य, कूटनीति और क्षेत्रीय गठबंधन’’ में डॉ. ओझा ने कहा कि अकबर की विस्तारवादी नीति का मुकाबला करने के लिए महाराणा प्रताप ने आसपास के राजपूत राज्यों के साथ मजबूत कूटनीतिक नेटवर्क विकसित किया। ईडर के राव नारायणदास और महाराणा प्रताप ने मिलकर मुगल सेना के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाए।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेंद्र नाथ पुरोहित ने अपनी नवीन शोध का हवाला देते हुए बताया कि महाराणा प्रताप के उत्तराधिकारी अमर सिंह का विवाह ईडर के शासक राव नारायणदास राठौड़ की पुत्री लचकुंवर से हुआ था। इस वैवाहिक संबंध से मेवाड़ की दक्षिण-पश्चिमी सीमा सुरक्षित हुई और मुगलों के विरुद्ध समर्थन मिला।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि ईडर और जालौर जैसी रियासतों ने मुगल अधीनता स्वीकार करने के बजाय स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े होकर प्रताप के संघर्ष को मजबूती दी। अध्यक्षता कर रहे डॉ. हरीश राव ने महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध रणनीतियों में समानता बताते हुए कहा कि दोनों शासकों ने परिस्थितियों के अनुरूप रणनीतिक युद्ध नीति अपनाकर विदेशी सत्ता को चुनौती दी।

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