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60 लाख के बिल पर बवाल, अब जांच ने बदली कहानी

Rajasthan

60 लाख के बिल पर बवाल, अब जांच ने बदली कहानी

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पहले नोटिस, बाद में मिली निर्माण की पुष्टि
तीन इंजीनियरों पर बिना पूरी जांच कार्रवाई के सवाल, हाई लेवल कमेटी और पंचायतों की रिपोर्ट में मिला सड़क निर्माण का उल्लेख
सलूंबर, 27 जुलाई:
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत कंतोड़ा से गनचौपड़ सड़क निर्माण के 60.74 लाख रुपये के पहले बिल को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। जिस मामले में पहले तीन इंजीनियरों पर बिना काम कराए बिल बनाने का आरोप लगाकर नोटिस थमा दिए गए थे, उसी मामले की बाद की जांच में सड़क पर निर्माण कार्य होने की बात सामने आई है। इससे विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला वीरपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र में बन रही सड़क का है। अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र पायल ने अधिशासी अभियंता मणिलाल मेघवाल, सहायक अभियंता विनायक कुमार जांगिड़ और कनिष्ठ अभियंता धर्मराज मेघवाल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा था कि 60 लाख 74 हजार 684 रुपये का पहला रनिंग बिल बिना काम कराए तैयार किया गया।
तीनों इंजीनियरों ने इस आरोप को गलत बताते हुए अतिरिक्त मुख्य अभियंता को अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सड़क पर मिट्टी का कार्य (अर्थवर्क), पाइप कलवर्ट और रिटेनिंग वॉल सहित स्वीकृत कार्य किए गए थे। सभी कार्यों का नियमानुसार मापन करने के बाद ही पहला बिल तैयार किया गया।
मामले की सच्चाई जानने के लिए अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई। समिति ने मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी।
सूत्रों के अनुसार जांच में सड़क पर नया निर्माण कार्य मिला है। हालांकि विभाग ने अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
इधर, ग्राम पंचायत वीरपुरा और पंचायत समिति जयसमंद ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पिछले पांच वर्षों में इस मार्ग पर किसी एजेंसी ने कोई निर्माण कार्य नहीं कराया था। इससे यह संकेत मिलता है कि वर्तमान में दिखाई दे रहा निर्माण हाल ही में कराया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब तकनीकी जांच पूरी ही नहीं हुई थी, तब तीन इंजीनियरों को नोटिस जारी करने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? यदि जांच में निर्माण कार्य मिला है, तो शुरुआती आरोप किस आधार पर लगाए गए थे? यही सवाल अब विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अधीक्षण अभियंता (गुण नियंत्रण) मुनीम चंद्र मीणा ने बताया कि जांच पूरी कर रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य अभियंता को सौंप दी गई है। अब अंतिम निर्णय रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद लिया जाएगा।

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