कुलगुरु ने पढ़ाया नैतिकता- उद्यमिता और सांस्कृतिक मूल्यों का पाठ
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उदयपुर, 5 अगस्त: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस) में बीबीए (ई डी) एवं एमबीए के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम बुधवार को हुआ। इस कार्यक्रम मे विद्यर्थियो के साथ उनके अभिभावक भी शामिल हुए। नव प्रवेशित प्रत्येक विद्यर्थि का तिलक लगा एवं उपर्णा पहना कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत के साथ हुआ, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया।
स्वागत उद्बोधन में डायरेक्टर प्रो. हनुमान प्रसाद ने विद्यार्थियों से अपने कर्तव्यों के प्रति उत्तरदायी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों और नैतिक शिक्षा का समावेश भी आवश्यक है। अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) कैलाश डागा ने पारदर्शिता, कृतज्ञता और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र, समाज, माता-पिता और शिक्षकों के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने विद्यर्थियो से भारत को सर्वश्रेष्ठ विकसित रास्ट्र बनाने मे योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता प्रो. गोविन्द नारायण पुरोहित ने जीवन में शांति ही सबकी अंतिम चाह है। धन धान्य, नाम सब अशांति मे होने पर व्यर्थ की वस्तुए होती है। उन्होंने कहा की मानव जीवन मे कितना ही धन सम्पदा जुटा ले लेकिन अंत मे वो शांति की तलाश मे ही रहता है। उन्होंने उद्यमियो एवं पुस्तकों के अनेक उदाहरण देते हुए परस्पर सहयोग, नैतिकता से कैसे शांति को शामिल करते हुए सफलता के पायदान पर पहुंचा जाता है विद्यर्थियो से साझा किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता और संतोष नैतिक आचरण से ही प्राप्त होते हैं। वहीं मुख्य अतिथि संदीप बापना ने विद्यार्थियों को रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने और अपने आसपास उपलब्ध अवसरों को पहचानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सामान्य दान से उद्यमिता को उतम कार्य बताया क्योकि दान का फायदा तो इंसान को कुछ ही समय होता है परंतु उद्यमिता से हजारो लोगो के परिवारों के जीवन भर पेट पाले जाते है। उन्होंने यू सी सी आई के द्वारा विद्यर्थियो के दक्षता के लिए आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमो की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. (डॉ.) मीरा माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के वातावरण से परिचित कराने के साथ-साथ नैतिकता, उत्तरदायित्व और उद्यमिता की भावना से प्रेरित करना रहा।

