नारायण सेवा संस्थान की पहल, मॉड्यूलर कृत्रिम अंग से मिली नई उम्मीद
उदयपुर, 23 अक्टूबर: नारायण सेवा संस्थान ने राजसमंद जिले के घोड़ाघाटी में दुर्घटना में अगला बायां पैर गंवा चुकी गोमाता को मॉड्यूलर कृत्रिम अंग लगाकर फिर से चलने में मदद की है। संस्थान की विशेषज्ञ टीम ने गोमाता की शारीरिक बनावट और जरूरतों के अनुरूप कृत्रिम पैर तैयार कर उसका फिटमेंट किया। कृत्रिम अंग के सहारे गोमाता को खड़ा करने और चलाने का प्रयास सफल रहा।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स (पीएंडओ) विभाग की विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा। टीम ने गोमाता की स्थिति का आकलन कर आवश्यक माप लिए। इसके बाद पीएंडओ विभाग की प्रमुख डॉ. मानस रंजन साहू के तकनीकी मार्गदर्शन में विशेष सामग्री और सटीक मॉडलिंग के आधार पर कृत्रिम अंग तैयार किया गया।
कृत्रिम पैर लगाने के लिए टीम दोबारा घोड़ाघाटी पहुंची। फिटमेंट के बाद गोमाता को खड़ा कर चलाने का प्रयास सफल रहा। इससे मौके पर मौजूद लोगों में खुशी छा गई।
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि मूक प्राणी अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, लेकिन उनकी तकलीफ समझना हमारा दायित्व है। संस्थान को खुशी है कि तकनीकी दक्षता और सेवा भावना से गोमाता को फिर से खड़े होकर चलने में मदद मिली।
नारायण सेवा संस्थान दिव्यांगजनों को आधुनिक कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। संस्थान की यह पहल तकनीक के माध्यम से मूक प्राणियों की पीड़ा कम करने का उदाहरण बनी है।