राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में संघ प्रमुख का बड़ा बयान, कहा- अकबर की जयंती कहीं नहीं मनाई जाती, यही विजय का प्रमाण
उदयपुर, 17 जून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में विजय महाराणा प्रताप की हुई थी, लेकिन इतिहासकारों ने इसके विपरीत नैरेटिव तैयार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुगल इतिहासकारों के विवरण भी बताते हैं कि युद्ध के दौरान मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि विजय किसकी हुई थी।
महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला में यह सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विभिन्न संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
“महाराणा प्रताप की जयंती मनती है, अकबर की नहीं”
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि यदि हल्दीघाटी युद्ध का वास्तविक परिणाम देखा जाए तो आज भी महाराणा प्रताप की जयंती पूरे सम्मान के साथ मनाई जाती है, जबकि अकबर की जयंती कहीं नहीं मनाई जाती। यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष का नैतिक और ऐतिहासिक विजेता कौन था। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक राजा या सेना का युद्ध नहीं था, बल्कि पूरे समाज के स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संघर्ष था।
“प्रताप के पास संसाधन कम थे, लेकिन मनोबल अटूट था”
भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप के पास न तो अकबर जैसी विशाल सेना थी और न ही अपार धन-संपदा, फिर भी उन्होंने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल शस्त्र और संख्या नहीं, बल्कि संकल्प और आत्मबल भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। प्रताप ने यह सिद्ध किया कि राष्ट्र और स्वाभिमान के लिए लड़ने वाला समाज कभी पराजित नहीं होता।
तीन घटनाओं का हवाला देकर बताया विजय का आधार
संघ प्रमुख ने हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े तीन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले आक्रमण में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा। दूसरे चरण में प्रताप के घोड़े चेतक ने मुगल सेनापति के हाथी तक पहुंचकर अद्भुत पराक्रम दिखाया। तीसरे चरण में युद्ध के बाद मुगल सेना गोगुंदा में सीमित होकर रह गई और खुले तौर पर आगे बढ़ने का साहस नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों को देखकर कोई भी समझ सकता है कि वास्तविक बढ़त किस पक्ष को मिली थी।
“इतिहासकारों की आदत नैरेटिव गढ़ने की रही है”
भागवत ने इतिहास लेखन पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार इतिहासकारों ने घटनाओं को वास्तविकता से अलग रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा बाबू कुंवर सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजी इतिहास में कई तथ्यों को तोड़-मरोड़कर लिखा गया। संभवतः महाराणा प्रताप के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिसके कारण विजय की स्पष्ट घटनाओं के बावजूद अलग धारणा बनाई गई।
मंच पर तीन ही लोग, मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री—नेता नीचे बैठे
समारोह के मुख्य मंच पर संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित तीन ही लोगों की व्यवस्था थी, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन सिंह राठौड़, सांसद सीपी जोशी, सांसद मन्नालाल रावत, सतीश पूनिया, सांसद महिमा कुमारी, धरोहर संरक्षण प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत के अलावा महाराणा प्रताप के वंशज नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह आदि मौजूद थे।
इतिहास गुलामी का नहीं, संघर्ष और स्वाभिमान का रहा है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राष्ट्र चेतना संकल्प सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का इतिहास कभी गुलामी स्वीकार करने का इतिहास नहीं रहा, बल्कि यह निरंतर संघर्ष और स्वाभिमान की रक्षा का इतिहास है। उन्होंने कहा कि जब-जब विदेशी आक्रांताओं ने इस भूमि पर कदम रखा, तब-तब भारतीय समाज ने उनका प्रतिरोध किया।
भागवत ने बप्पा रावल, ललितादित्य, राणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे वीरों का स्मरण करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने विदेशी शक्तियों के सामने झुकने से इनकार किया और राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, स्वाभिमान और प्रतिरोध की परंपरा से बनी है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप केवल इतिहास के एक पात्र नहीं हैं, बल्कि आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके त्याग, न्यायप्रियता और राष्ट्रभक्ति के आदर्श आज भी समाज को दिशा प्रदान करते हैं। प्रताप ने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
हल्दीघाटी विजय का सत्य जन-जन तक पहुंचाना होगा: डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा
महाराणा प्रताप जयंती एवं हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हल्दीघाटी युद्ध के वास्तविक इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जाए। वर्षों से समाज में फैलाई गई भ्रांतियों का तथ्यात्मक आधार पर निराकरण करना आवश्यक है।
सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि इस वर्ष महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने का दुर्लभ संयोग बना है। उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाण यह स्पष्ट करते हैं कि हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप ने मुगल सेना का प्रभावी प्रतिरोध करते हुए स्वाधीनता, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म की रक्षा की थी।
उन्होंने कहा कि यह युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच संघर्ष नहीं था, बल्कि विदेशी साम्राज्यवादी शक्तियों के विरुद्ध भारतीय अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा का अभियान था। मेवाड़ ने कभी भी विदेशी सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी।
डॉ. शर्मा ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे नई पीढ़ी तक हल्दीघाटी विजय का संदेश पहुंचाएं। उन्होंने आयोजन को राष्ट्रचेतना के नवजागरण का ऐतिहासिक अभियान बताते हुए प्रशासन, मीडिया, सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई केंद्रीय मंत्री और संत-महंत रहे उपस्थित
राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और भागीरथ चौधरी सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
सभा में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़, सांसद सीपी जोशी, डॉ. मन्नालाल रावत, राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया तथा धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत भी उपस्थित थे। विशेष रूप से मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य और नाथद्वारा विधायक महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र रही। संयोगवश बुधवार को उनका जन्मदिन भी था।
कार्यक्रम में सांसद महिमा कुमारी मेवाड़, विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़, ताराचंद जैन, फूल सिंह मीणा, शंकर ढेचा, अर्जुनलाल जीनगर, श्रीचंद कृपलानी और लालाराम बैरवा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख अरुण जैन, राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल, प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संगठन मंत्री जे. नंदकुमार सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और विश्वविद्यालयों के कुलगुरु भी समारोह में उपस्थित रहे। संत-महंतों के सान्निध्य ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।