डॉ. पी.सी. जैन बोले- भूजल बचाने के लिए वर्षाजल संरक्षण अब समय की जरूरत
उदयपुर, 13 मई: कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सॉइल एंड वॉटर विभाग सभागार में रेन वाटर हार्वेस्टिंग विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वाटर हीरो डॉ. पी.सी. जैन ने विद्यार्थियों और इंजीनियरों को वर्षाजल संरक्षण का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह द्वारा डॉ. जैन के स्वागत एवं परिचय से हुई। अपने प्रेजेंटेशन में डॉ. पी.सी. जैन ने कहा कि राजस्थान में देश का सर्वाधिक भूजल दोहन हो रहा है, जबकि शहरों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगभग नगण्य है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा।
उन्होंने “देवास वाटर फिल्टर” प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि एक हजार वर्ग फीट की छत पर एक सेंटीमीटर बारिश होने पर लगभग 1000 लीटर पानी भूजल में रिचार्ज किया जा सकता है। उन्होंने केसिंग सिस्टम, रिचार्ज प्रक्रिया और जलस्तर बढ़ने से बिजली बचत जैसे तकनीकी पहलुओं पर भी जानकारी दी।
डॉ. मंजीत सिंह ने वर्षाजल को व्यर्थ होने से रोकने और सिस्टम को अधिक ऑटोमेटिक एवं सरल बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विद्यार्थियों से एम-टेक स्तर पर शोध भी करवाया जा रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. जैन ने विद्यार्थियों से रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े प्रश्न पूछे। सही उत्तर देने पर मंगेश भारती गोस्वामी, रक्षित जैन, विनय शर्मा और वर्षा रानी पोद्दार को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
असिस्टेंट प्रोफेसर बलराम शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में डॉ. जैन ने विद्यार्थियों को सीखने के लिए एक फिल्टर भेंट किया और सभी को अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाने का संकल्प दिलाया।