12 वर्षों में 165 गुना बढ़ा निर्यात, उत्पादन 6.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा; सेमीकॉन 2.0 को 1.275 लाख करोड़ की मंजूरी
उदयपुर, 24 जुलाई: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। देश अब निर्यात होने वाले मोबाइल फोन का लगभग 99.2 प्रतिशत स्वयं निर्मित कर रहा है। वर्ष 2014-15 में जहां मोबाइल फोन का निर्यात केवल 1,500 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2026 तक यह बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यानी महज 12 वर्षों में मोबाइल निर्यात में 165 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 18 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान उत्पादन में 33 गुना वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग वर्तमान में देश में लगभग 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत सेमीकंडक्टर विनिर्माण को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। जनवरी 2022 में शुरू किए गए 76 हजार करोड़ रुपये के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत छह राज्यों में फैली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 32 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
सेमीकॉन 2.0 से मिलेगा नई तकनीक को बड़ा बल
केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को 1.275 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है। इसके तहत सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण और पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। अब तक 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को अत्याधुनिक डिजाइन टूल उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है।