आईकॉम इंडिया की वार्षिक कॉन्फ्रेंस का सिटी पैलेस संग्रहालय में शुभारंभ, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
उदयपुर, 24 जुलाई: बदलते समय में संग्रहालयों की भूमिका केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे समाज, संस्कृति और समुदायों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। यह बात महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम्स (आईकॉम) इंडिया की दो दिवसीय वार्षिक कॉन्फ्रेंस-2026 के उद्घाटन अवसर पर कही। सिटी पैलेस संग्रहालय में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से संग्रहालय विशेषज्ञ, शोधकर्ता, क्यूरेटर और संरक्षण विशेषज्ञ शामिल हुए।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, जनसहभागिता और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत बनाने के लिए ऐसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन समय-समय पर आयोजित होना आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन संग्रहालयों और विरासत संरक्षण से जुड़े सार्थक प्रयासों को सदैव सहयोग देता रहेगा।
सम्मेलन का शुभारंभ खुश महल में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में आईकॉम के उपाध्यक्ष नासिर अल दरमाकी, आईकॉम इंडिया की अध्यक्षा प्रो. अंबिका पटेल तथा फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने संग्रहालयों की बदलती भूमिका पर विचार रखे। इस अवसर पर ‘कॉन्फ्रेंस एब्स्ट्रैक्ट’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
विरासत संरक्षण और सहभागिता पर हुआ मंथन
सम्मेलन के पहले दिन आईकॉम के उपाध्यक्ष नासिर अल दरमाकी ने “Whose Voice? Redefining Co-curation, Living Heritage and Partnerships in Museums” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। इसके बाद “बदलते समय में संग्रहालय और समुदाय” विषय पर पैनल चर्चा, शोधपत्र वाचन, पोस्टर प्रस्तुतियां तथा संरक्षण विशेषज्ञों के तकनीकी सत्र आयोजित हुए। देशभर से आए विशेषज्ञों ने संग्रहालयों को अधिक जनोन्मुखी और तकनीक आधारित बनाने के सुझाव भी साझा किए।