करोड़ों की योजनाएं और ‘सीवरमुक्त झील’ के दावे सवालों के घेरे में, पेयजल स्रोत तक पहुंच रहा प्रदूषण
गोपाल लोहार
उदयपुर, 12 जून: उदयपुर की पहचान और शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली पिछोला तथा स्वरूपसागर झील को सीवरमुक्त बनाने के दावे जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल के औचक निरीक्षण में खोखले साबित हुए। वर्षों से झील प्रेमियों और नागरिकों द्वारा उठाए जा रहे प्रदूषण के मुद्दे पर आखिरकार प्रशासन की मुहर लग गई। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर सीवरेज चैंबरों में ग्रीसयुक्त कचरा, किचन वेस्ट और ओवरफ्लो होती सीवर लाइनें मिलने से स्पष्ट संकेत मिले कि दूषित पानी अब भी झीलों तक पहुंच रहा है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पिछोला झील का पानी शहर की पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में सीवर और गंदे अपशिष्ट के झील में मिलने की आशंका सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय बन गई है।
चांदपोल, गणगौर घाट, लालघाट, नावघाट और आसपास के क्षेत्रों में निरीक्षण के दौरान कई सीवरेज चैंबर खुले और जर्जर मिले। जांच में सामने आया कि अनेक होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना ग्रीस चैंबर के सीधे सीवर लाइन में अपशिष्ट छोड़ रहे हैं, जिससे सीवर जाम होकर गंदा पानी झीलों की ओर बह रहा है।
कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
झील के पानी की सैंपलिंग होगी
ड्रोन सर्वे से प्रदूषण स्रोतों की पहचान
विशेष निगरानी टीम का गठन
बिना ग्रीस चैंबर वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई
सीवर लीकेज और ओवरफ्लो की जांच