ढाई वर्ष भटके श्रीनाथजी, साक्षी बनने पैदल चले गोपालजी : प्रशांत अग्रवाल

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उदयपुर, 22 सितम्बर: नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने जलझूलनी एकादशी पर आस्था चैनल के ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में भगवान श्रीनाथजी, साक्षी गोपाल और भक्त सेना से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि औरंगजेब के शासनकाल में मंदिरों पर संकट के दौरान श्रीनाथजी को गोवर्धन से सुरक्षित स्थान ले जाया गया। करीब ढाई वर्ष बाद महाराणा राजसिंह के प्रयास से रथ मेवाड़ पहुंचा। सिहाड़ गांव के पास बनास नदी किनारे रथ का पहिया धंस गया। इसे भगवान की इच्छा मानकर वहीं मंदिर बनाया गया, जो आगे चलकर नाथद्वारा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। साक्षी गोपाल की कथा में उन्होंने बताया कि एक युवक के विवाह वचन की गवाही देने गोपालजी वृंदावन से उसके पीछे चले और ओडिशा में विराजित हुए। भक्त सेना की कथा में भगवान द्वारा उनका रूप धरकर राजा की सेवा करने का प्रसंग सुनाया गया।

आईसीएमआर-एसटीएस में पीएमसीएच के मेडिकल छात्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

उदयपुर, 22 सितम्बर: पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के मेडिकल छात्रों ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की अल्पकालिक छात्रवृत्ति (एसटीएस) अनुसंधान योजना में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में संस्थान के 8 विद्यार्थियों के रिसर्च प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। वर्ष 2026 में मालवी अग्रवाल, भूमिका अग्रवाल और यकृत जैन के प्रोजेक्ट चयनित हुए। इनके मार्गदर्शक डॉ. आशीष गोयल, डॉ. नीता साही और डॉ. सौरभ गोयल हैं। वर्ष 2025 में भी पांच विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे। पीएमसीएच चेयरमैन राहुल अग्रवाल, पीएमयू प्रेसिडेंट डॉ. एम.एम. मंगल और प्रिंसिपल डॉ. यू.एस. परिहार ने विद्यार्थियों व गाइड्स को बधाई दी। नोडल इंचार्ज डॉ. रोहिताश यादव ने बताया कि विद्यार्थियों को शोध पद्धति, प्रोटोकॉल, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक प्रस्तुति का प्रशिक्षण दिया जाता है।

सोने की पालकी में नगर भ्रमण पर निकले ठाकुरजी

राजसमंद, 22 सितम्बर: गढ़बोर स्थित प्रसिद्ध चारभुजानाथ मंदिर में जलझूलनी एकादशी पर मंगलवार को मेले का आयोजन हुआ। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश सहित प्रदेशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। इस अवसर पर ठाकुरजी को सोने की पालकी में विराजित कर शाही लवाजमे के साथ नगर भ्रमण कराया जा रहा है। शोभायात्रा में हाथी-घोड़े और पुजारी परिवार का लवाजमा शामिल है। लवाजमे में गदा, भाला, तलवार, बंदूक सहित अस्त्र-शस्त्र भी शामिल हैं। शोभायात्रा में गुलाल उड़ाने की परंपरा भी निभाई जा रही है। नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा दूधतलाई पहुंचेगी। यहां परिक्रमा के बाद ठाकुरजी को स्नान कराया जाएगा। जलझूलनी एकादशी का यह आयोजन वर्ष में एक बार होता है।