उदयपुर, 29 अक्टूबर: कबीरपंथी संस्था की ओर से सुहालका भवन में आयोजित सदगुरु कबीर चरितम कथा के चौथे दिन धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने उपासना, ज्ञान और भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि उपासना चित्त की शुद्धि का साधन है। सेवा, पूजा-अर्चना और उपवास जैसे कर्म मन को शुद्ध करने में सहायक होते हैं। जब तक मन शुद्ध नहीं होगा, तब तक भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने भक्तों के दो प्रकार समझाने के लिए बिल्ली और बंदरिया के बच्चों का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, एक भक्त पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर पर निर्भर रहता है, जबकि दूसरा कठिन परिस्थितियों में भी स्वयं धैर्य और समर्पण बनाए रखता है। कथा में महंत तपसी दास सहित संस्था के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।