उम्मीद: 2554 करोड़ की परियोजना का 95 फीसदी कार्य पूरा, डेढ़ से दो माह में शेष काम होने की उम्मीद; जवाई बांध को मिलेगा नया जीवन
उदयपुर, 16 जून : दक्षिण राजस्थान का उदयपुर अब पश्चिमी राजस्थान की प्यास बुझाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। कोटड़ा तहसील स्थित सेई बांध से जुड़े 2554.23 करोड़ रुपये की लागत वाले जल प्रबंधन एवं स्थानांतरण कार्य का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शेष पांच प्रतिशत कार्य भी अगले डेढ़ से दो माह में पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद मारवाड़ क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
मानसून के अतिरिक्त जल का होगा बेहतर उपयोग
वर्षों से सेई नदी और साबरमती बेसिन का अतिरिक्त मानसूनी पानी गुजरात की ओर बह जाता था। नई परियोजना के तहत इस जल का संरक्षण कर उसे राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे प्रदेश के अतिरिक्त जल का उपयोग प्रदेश के ही लोगों के हित में किया जा सकेगा।
जवाई बांध को मिलेगा नया संबल
पाली जिले का जवाई बांध मारवाड़ की जीवनरेखा माना जाता है। पाली, सिरोही और जालोर जिलों की बड़ी आबादी इसकी पेयजल आपूर्ति पर निर्भर है। सेई क्षेत्र से अतिरिक्त जल मिलने के बाद जवाई बांध का पुनर्भरण अधिक प्रभावी होगा, जिससे गर्मी के मौसम में पेयजल संकट की आशंका कम हो सकेगी।
738 गांवों और 9 शहरों को लाभ
परियोजना के पूरा होने पर पाली जिले के 9 शहरों और 560 गांवों के साथ सिरोही जिले के शिवगंज क्षेत्र सहित 178 गांवों को बेहतर पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा टैंकर आधारित जलापूर्ति पर निर्भरता घटेगी।
भूजल स्तर सुधरने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि सतही जल की उपलब्धता बढ़ने से भूजल दोहन कम होगा। इससे लगातार गिर रहे भूजल स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और भविष्य की जल सुरक्षा मजबूत होगी।
मारवाड़ के लिए ऐतिहासिक कदम
जल संसाधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना दक्षिण राजस्थान और मारवाड़ के बीच जल संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि शेष कार्य निर्धारित समय में पूरा हो जाता है तो आने वाले मानसून के बाद मारवाड़ को सेई बांध की जीवनदायिनी जलधारा का लाभ मिलना शुरू हो सकता है।
फैक्ट फाइल
परियोजना लागत : 2554.23 करोड़ रुपये
कार्य प्रगति : लगभग 95 प्रतिशत
शेष कार्य : 5 प्रतिशत
संभावित पूर्णता : डेढ़ से दो माह
लाभान्वित शहर : 9
लाभान्वित गांव : 738
प्रमुख लाभ : जवाई बांध का पुनर्भरण, पेयजल सुरक्षा और भूजल संरक्षण