पेयजल झीलों में लगे डीजल नावों पर रोक, बनाया जाए आधुनिक बोटिंग कानून
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झील संरक्षण से जुड़े महेश शर्मा ने जिला कलेक्टर को भेजे 27 सुझाव; नावों की संख्या, गति, लाइसेंस, यात्री बीमा और रेस्क्यू व्यवस्था तय करने पर जोर
उदयपुर, 9 अगस्त: उदयपुर की पिछोला, फतहसागर सहित पेयजल झीलों में नाव संचालन को लेकर झील संरक्षण से जुड़े महेश शर्मा ने जिला झील प्राधिकरण सुरक्षा एवं विकास समिति के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर व्यापक नीति बनाने की मांग की है। उन्होंने करीब सात दशक पुराने राजस्थान रेगुलेशन बोटिंग एक्ट, 1956 और बोटिंग रूल्स, 1957 में बदलाव के साथ आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ‘राजस्थान अंतर्देशीय नौका एवं जल पर्यटन सुरक्षा अधिनियम’ बनाने का सुझाव दिया है। शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के साथ यात्री सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
पेयजल झीलों में डीजल-पेट्रोल नावों पर पूर्ण रोक
शर्मा ने पेयजल झीलों में जीवाश्म ईंधन से चलने वाली नावों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा इलेक्ट्रिक और सौर ऊर्जा आधारित नावों को प्रोत्साहित करने की मांग की। झीलों की भार वहन क्षमता के आधार पर नावों की संख्या निर्धारित करने और आइलैंड व मेनलैंड प्रॉपर्टी के लिए अलग-अलग सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है।
हर नाव की डिजिटल निगरानी और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य
सुझावों में प्रत्येक नाव का डिजिटल पंजीकरण, क्यूआर कोड और जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य करने की मांग है। लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, फायर एक्सटिंग्विशर, प्राथमिक उपचार किट, संचार उपकरण और नेविगेशन लाइट जरूरी करने का सुझाव दिया गया। हर नाव में न्यूनतम दो लाइफ बॉय तथा पांच यात्रियों पर एक लाइफ बॉय की व्यवस्था की मांग की गई है।
लाइसेंस, फिटनेस और यात्री बीमा पर जोर
नाव चालकों के लिए प्रशिक्षण, परीक्षा, मेडिकल फिटनेस और लाइसेंस नवीनीकरण की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। व्यावसायिक नावों में यात्रियों की सूची रखने, व्यक्तिगत बीमा अनिवार्य करने और नाव की फिटनेस का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराने का सुझाव दिया गया।
फतहसागर में रेस्क्यू व्यवस्था मजबूत करने की मांग
शर्मा ने नेहरू गार्डन के पीछे तक नावों के संचालन पर रेस्क्यू व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताते हुए स्पीड जोन, नो-वेक जोन और सुरक्षित नेविगेशन चैनल बनाने का सुझाव दिया। खराब मौसम में नाव संचालन रोकने, वाटर स्पोर्ट्स के राष्ट्रीय सुरक्षा मानक लागू करने और दुर्घटनाओं की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था की मांग भी की गई।
डिविडिंग मशीनों में डीजल खपत पर भी सवाल
पत्र में जलकुंभी हटाने वाली डिविडिंग मशीनों में डीजल उपयोग की पर्यावरणीय समीक्षा की मांग की गई। शर्मा ने विशेषज्ञ समिति गठित कर उसकी अनुशंसाएं राज्य सरकार को भेजने तथा आवश्यक संशोधन के लिए गजट अधिसूचना जारी कराने का सुझाव दिया है।

