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सांवलियाजी मंदिर में मोरपंख और 56 भोग पर रोक

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सांवलियाजी मंदिर में मोरपंख और 56 भोग पर रोक

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भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था सुधारने के लिए मंदिर प्रशासन ने बदले नियम
चित्तौड़गढ़, 25 अप्रैल
: चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध श्रीसांवलियाजी मंदिर में अब श्रद्धालु मोरपंख और 56 भोग नहीं चढ़ा सकेंगे। बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। अब भक्त केवल नकद राशि या सोना-चांदी जैसी भेंट ही भंडार में दे सकेंगे और दर्शन के लिए खाली हाथ जाना होगा।
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव ने बताया कि हाल के समय में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोग 56 भोग लेकर पहुंचते थे, जिससे गर्भगृह के सामने लंबा समय लग जाता था। एक बार 56 भोग लगाने में लगभग एक घंटा लगता था, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही थी।
प्रशासन के अनुसार कई श्रद्धालु भोग चढ़ाने के बाद परिसर में फोटो-वीडियो बनाते थे, जबकि यह पहले से प्रतिबंधित था। इस कारण कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती थी। नकली मावे की मिठाइयों, कृत्रिम फूलों और नकली मोरपंख की बढ़ती शिकायतें भी प्रशासन की चिंता का कारण बनीं।
नई व्यवस्था के तहत विशेष भोग के लिए अलग से रसीद आधारित व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना है। फैसले पर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है।

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