बदलती जीवनशैली बना रही हड्डियों और जोड़ों को बीमार
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स्क्रीन टाइम, गलत पॉश्चर और निष्क्रिय दिनचर्या से 25-45 आयु वर्ग में बढ़ीं ऑर्थोपेडिक समस्याएं, उदयपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
उदयपुर, 12 जुलाई: मोबाइल और कंप्यूटर के सामने घंटों बैठना, शारीरिक गतिविधियों में कमी, मोटापा और अनियमित जीवनशैली अब युवाओं की हड्डियों और जोड़ों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। यही कारण है कि पहले बुजुर्गों में दिखाई देने वाली घुटनों, रीढ़ और कूल्हों की समस्याएं अब 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में तेजी से बढ़ रही हैं।
इसी विषय पर शैल्बी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स की ओर से स्पेक्ट्रम रिसोर्ट में आयोजित ‘उदयपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम-2026’ में देश के प्रमुख ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक लोगों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
शैल्बी हॉस्पिटल्स के संस्थापक एवं देश के अग्रणी जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पॉश्चर और अत्यधिक स्क्रीन टाइम कम उम्र में ही कमर दर्द, गर्दन दर्द और घुटनों की समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दर्द को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक तकनीकों ने ऑर्थोपेडिक उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। अब कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से रिकवरी संभव हो रही है तथा कई मरीज सर्जरी के कुछ ही दिनों में सामान्य गतिविधियां शुरू कर देते हैं।
स्वस्थ हड्डियों और जोड़ों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें
मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग करते समय सही पॉश्चर रखें
नियमित स्ट्रेचिंग और व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
जोड़ों या कमर दर्द को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच कराएं
