डकैती की साजिश साबित नहीं हुई, लेकिन अवैध हथियार रखने पर चार दोषी करार
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अपर सेशन न्यायालय का फैसला: डकैती के आरोपों से बरी, आर्म्स एक्ट में 3 साल की सजा
उदयपुर, 17 अप्रैल: उदयपुर की अपर सेशन न्यायालय (क्रम संख्या-2) ने डकैती की योजना बनाने और अवैध हथियार रखने के बहुचर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया है। न्यायाधीश दमयंती पुरोहित ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष डकैती की साजिश साबित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 399 और 402 के तहत संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया। हालांकि, अवैध हथियार रखने के आरोप प्रमाणित होने पर चार आरोपियों को सजा सुनाई गई।
मामला 14 नवंबर 2016 का है, जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आयड़ ईदगाह के पास कुछ लोग पेट्रोल पंप पर डकैती डालने की योजना बना रहे हैं। सूचना पर पुलिस और डीएसटी टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर आफताब शेख, अकरम खान, शोएब और नरेंद्र पानेरी को गिरफ्तार किया था। इनके पास से देशी पिस्टल, रिवॉल्वर, जिंदा कारतूस और एक धारदार चाकू बरामद किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपियों के पास से अवैध हथियारों की बरामदगी साबित होती है। इस आधार पर आफताब शेख, अकरम खान, शोएब और नरेंद्र पानेरी को आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अलावा शोएब को चाकू रखने के मामले में धारा 4/25 के तहत एक वर्ष के अतिरिक्त कठोर कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया।
अदालत ने कहा कि पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि आरोपी किस पेट्रोल पंप को निशाना बनाने वाले थे। मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और न ही कोई ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग पेश की गई। पुलिस की यह थ्योरी भी कमजोर मानी गई कि उसने आरोपियों की बातचीत सुनकर डकैती की योजना का खुलासा किया।
इसी आधार पर अदालत ने इमरान खान, सिल्वेस्टर और मोहम्मद शाहीन को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि डूंगरलाल अब भी फरार बताया गया है। अदालत के इस फैसले को साक्ष्य की गुणवत्ता पर आधारित महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
