धर्मांतरण या साजिश? बांसवाड़ा हिंसा पर उठे कई सवाल
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सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल सहित चार गिरफ्तार, सभा पर विवाद और हिंसा की शुरुआत
बांसवाड़ा, 4 मई: जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र में कथित धर्मांतरण को लेकर भड़की हिंसा अब कानूनी और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गई है। मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तार लोगों में सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल भी शामिल है।
शुक्रवार शाम एक संगठन के कार्यकर्ताओं को एक सभा की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने आरोप लगाया कि वहां धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही थीं। विरोध करने पर कथित रूप से करीब 100 लोगों ने उन पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों और पत्थरबाजी में 3 कार्यकर्ता घायल हुए, जिनमें से 2 को गंभीर हालत में गुजरात रेफर किया गया।
रवि भाभोर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोपियों में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल मुकेश रावत और उनके पिता, सेवानिवृत्त शिक्षक अनिल रावत का नाम भी शामिल है। पुलिस अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
अनुमति नहीं, कानून के तहत केस
प्रशासन के अनुसार सभा के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसी आधार पर राजस्थान गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध विधेयक, 2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पानी के कुंड में स्नान कराकर धर्मांतरण कराया जा रहा था।
स्थानीय लोगों का अलग दावा
दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने धर्मांतरण के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वहां केवल प्रार्थना सभा हो रही थी, जिसमें 100–150 लोग शामिल थे और किसी तरह का धर्मांतरण नहीं किया गया।
जांच में उलझे अहम सवाल
बिना प्रशासनिक अनुमति सभा क्यों आयोजित की गई?
100 लोगों की मौजूदगी में सिर्फ 4 ही गिरफ्तार क्यों हुए?
क्या यह मामला वाकई धर्मांतरण का है या स्थानीय विवाद?
क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है या गलतफहमी से बढ़ा तनाव?
