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अरावली संरक्षण व सतत खनन पर मंथन: वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

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अरावली संरक्षण व सतत खनन पर मंथन: वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

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उदयपुर, 29 मार्च: माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राजस्थान चैप्टर, उदयपुर द्वारा अरावली पर्वतमाला में सतत खनन पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. गोविंद सिंह भारद्वाज ने अरावली के भूवैज्ञानिक, पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि अरावली विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो लगभग 670 किमी तक फैली है और देश की खनिज अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। राजस्थान में खनन क्षेत्र करीब 23 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक उत्पादन और लाखों लोगों को रोजगार देता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं है, बल्कि अवैज्ञानिक खनन को रोककर वैज्ञानिक व संतुलित खनन को बढ़ावा देना जरूरी है। अरावली पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, जो मरुस्थलीकरण रोकने और जल संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है।
इस कार्यक्रम में ए.के .कोठारी , पी आर आमेटा, हितांशु कौशल, मकबूल अहमद, एम एस पालीवाल, वाई सी गुप्ता जैसे 70 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया और सतत विकास व पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया।

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