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ड्रोन से होगी जंगलों में सीड्स बॉल्स की बारिश

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ड्रोन से होगी जंगलों में सीड्स बॉल्स की बारिश

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अभियान : राजस्थान के दुर्गम वन क्षेत्रों में हाईटेक प्लांटेशन की तैयारी, 12 हजार सीड्स बॉल्स होंगे इस्तेमाल
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 9 मई:
राजस्थान के दुर्गम और पहाड़ी वन क्षेत्रों को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए वन विभाग अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। जंगलों में पौधारोपण के लिए पहली बार ड्रोन तकनीक से सीड्स बॉल्स गिराने की योजना तैयार की गई है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ यह अभियान शुरू होगा। वन विभाग का मानना है कि इससे उन इलाकों में भी हरियाली बढ़ाई जा सकेगी, जहां अब तक पहुंचना बेहद मुश्किल था।
20 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा पहला प्रयोग
वन विभाग ने शुरुआती चरण में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के करीब 20 हेक्टेयर दुर्गम क्षेत्र को चिन्हित किया है। यहां प्रति हेक्टेयर लगभग 600 सीड्स बॉल्स गिराए जाएंगे। इस तरह करीब 12 हजार सीड्स बॉल्स का उपयोग कर पौधारोपण किया जाएगा।
वन अधिकारियों के अनुसार कई वन क्षेत्रों में आगजनी, सूखा और प्राकृतिक कारणों से हरियाली कम हो गई है। पहाड़ी, पथरीले और घने जंगलों वाले इलाकों तक वनकर्मियों और मजदूरों का पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे में ड्रोन तकनीक समय और संसाधनों की बचत के साथ बड़े क्षेत्र में प्लांटेशन संभव बनाएगी।
ग्रामीणों की मदद से तैयार हो रहे सीड्स बॉल्स
वन विभाग इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और वीएफएमसी (विलेज फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी) की मदद ले रहा है। मिट्टी, खाद और रेत के मिश्रण से तैयार सीड्स बॉल्स में अलग-अलग प्रजातियों के बीज डाले जा रहे हैं। प्रत्येक बॉल में दो बीज रखे जा रहे हैं ताकि अंकुरण की संभावना बढ़ सके।
सीतामाता सहित अन्य क्षेत्रों में भी होगी शुरुआत
वन विभाग की डीएफओ मृदुला सिंह ने बताया कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे सीतामाता सेंचुरी सहित राजस्थान के अन्य दुर्गम वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहभागिता के मेल से जंगल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

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