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हाईरिस्क गर्भवतियों की नामवार निगरानी करें, प्रसव के बाद 24 घंटे रखें विशेष मॉनिटरिंग: मुख्य सचिव

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हाईरिस्क गर्भवतियों की नामवार निगरानी करें, प्रसव के बाद 24 घंटे रखें विशेष मॉनिटरिंग: मुख्य सचिव

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उदयपुर, 19 जुलाई: प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के चिकित्सा अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव एवं ऑपरेशन से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि प्रत्येक प्रसूता की डिलीवरी के बाद कम से कम 24 घंटे तक गहन चिकित्सकीय निगरानी की जाए तथा उसके पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखा जाए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि मुख्य सचिव ने प्रत्येक जिले में उच्च जोखिम (हाईरिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की नामवार सूची तैयार करने और प्रत्येक महिला को संबंधित एएनएम एवं सीएचओ से मैप कर नियमित निगरानी कराने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर समय पर रेफरल सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने सभी सीएमएचओ और जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों को सोमवार सुबह एएनएम की बैठक लेकर हाईरिस्क गर्भवतियों की लाइन लिस्ट एवं जोखिम के कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए, ताकि समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटे में हुए सामान्य और सिजेरियन प्रसव की जानकारी ली। इस दौरान लेबर रूम प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन तथा रेफरल प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना पर विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने बताया कि जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू में सर्वाधिक हाईरिस्क गर्भवती महिलाएं चिन्हित हुई हैं। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम या उससे कम है अथवा गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं, उन्हें आवश्यकता अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम इंजेक्शन या आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराकर प्रसव से पहले उनकी स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। ऐसे सभी मामलों की जानकारी संबंधित एएनएम, आरसीएचओ और सीएमएचओ स्तर पर उपलब्ध रखने तथा प्रत्येक तीसरे दिन स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व योजना अत्यंत आवश्यक है। गर्भवती महिला की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अस्पताल का चयन, संभावित प्रसव तिथि, रेफरल व्यवस्था तथा ममता कार्ड में सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से दर्ज होना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में उदयपुर से सीएमएचओ प्रथम, सीएमएचओ द्वितीय, डिप्टी सीएमएचओ, अतिरिक्त सीएमएचओ, आरसीएचओ, बीसीएमओ सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। जयपुर से चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, एनएचएम की अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।

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