एमबी अस्पताल में महंगी धर्मशाला, मरीजों के तीमारदारों की बढ़ी मुश्किल
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उदयपुर, 15 अप्रैल: महाराणा भूपाल राजकीय अस्पताल (एमबी अस्पताल) में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के सामने ठहरने की समस्या गंभीर होती जा रही है। अस्पताल परिसर में मौजूद सेठ रामेश्वर लाल सहारिया धर्मशाला, जो कभी जनसेवा का प्रतीक मानी जाती थी, अब गरीब परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बनती नजर आ रही है।
धर्मशाला में लैटबाथ अटैच कमरे के लिए 300 रुपए, सामान्य कमरे के लिए 200 रुपए और डोरमेट्री बेड के लिए 100 रुपए प्रतिदिन शुल्क लिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिजन इन दरों को वहन नहीं कर पा रहे, जिसके चलते कई लोग अस्पताल परिसर, गलियारों या खुले स्थानों पर रात बिताने को मजबूर हैं।
हाल ही में एक नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ की घटना ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। पैसों के अभाव में मरीज के परिजन अस्पताल के बाहर ही सो रहे थे। मरीज पूनम सिंह के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में अपने बेटे के उपचार के लिए एमबी अस्पताल आए। यहां सात दिन तक उपचार चलेगा। अब इतने पैसे नहीं हैं कि परिवार के सभी लोग धर्मशाला में कमरा लेकर ठहर पाएं। केवल रोटी—पानी के ही पैसे हैं। पहले पचास से सौ रुपए में तीन—चार लोग कमरा लेकर ठहर जाया करते थे। अब दो सदस्यों से अधिक लोगों को एक कमरा नहीं मिलता। उनका कहना है कि जब अस्पताल में इलाज मुफ्त है, तो ठहरने के लिए इतनी ऊंची दरें क्यों वसूली जा रही हैं। इस मामले में उनकी मांग है कि जिला प्रशासन धर्मशाला में ठहरने की दरों पर नियंत्रण रखे।
इधर, एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुमन का कहना है कि धर्मशाला ठेके पर है और उसके रख—रखाव पर खर्चा बढ़ने के कारण संभवत: किराए में बढ़ोतरी की होगी।
