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रजिस्टर्ड वसीयत के बावजूद पांच साल अटकी रही एफडी की राशि

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रजिस्टर्ड वसीयत के बावजूद पांच साल अटकी रही एफडी की राशि

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स्थायी लोक अदालत का आदेश, बैंक को ब्याज सहित भुगतान और 32 हजार रुपए हर्जाना देने के निर्देश
उदयपुर, 24 अक्टूबर:
मां की पंजीकृत वसीयत होने के बावजूद चार एफडी की राशि करीब पांच साल तक बेटे को नहीं देना बैंक ऑफ बड़ौदा को भारी पड़ा। स्थायी लोक अदालत ने बैंक को एफडी की पूरी राशि ब्याज सहित परिवादी को देने तथा मानसिक संताप और परिवाद व्यय के लिए कुल 32 हजार रुपए अदा करने के निर्देश दिए हैं। एक माह में आदेश की पालना नहीं होने पर 21 अक्टूबर 2021 से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
प्रकरण के अनुसार सेंट्रल एरिया निवासी संजय पालीवाल की मां मनोहर देवी ने 1 दिसंबर 2008 को बैंक में जमा राशि के संबंध में बेटे के नाम पंजीकृत वसीयत की थी। मां का निधन 1 अप्रैल 2021 को हुआ। इसके बाद संजय ने चारों एफडी की राशि के भुगतान के लिए आवेदन किया।
बैंक ने 14 अक्टूबर 2021 को प्रोबेट ऑफ विल प्रस्तुत करने को कहा। परिवादी ने अधिवक्ताओं के माध्यम से राजस्थान में प्रोबेट अनिवार्य नहीं होने के संबंध में हाईकोर्ट के निर्णय का हवाला दिया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। कई बार मांग के बाद संजय ने 15 अप्रैल 2026 को स्थायी लोक अदालत में परिवाद दायर किया।
सुनवाई में अदालत ने पाया कि बैंक यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि भुगतान के लिए कौन से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए थे। किसी अन्य दावेदार की ओर से भी राशि पर दावा या वसीयत पर आपत्ति सामने नहीं आई। अदालत ने बैंक को जमा राशि ब्याज सहित लौटाने और 32 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया।

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