अंतरराष्ट्रीय लेक्रोज में भारत को कांस्य, उदयपुर की 9 बेटियों ने बढ़ाया देश का गौरव
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मलेशिया में भारतीय महिला टीम का शानदार प्रदर्शन; उदयपुर के जनजाति क्षेत्र की खिलाड़ियों ने दिखाया दम, सिंगापुर को 10-9 से हराकर जीता पदक
उदयपुर, 31 अगस्त: मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय लेक्रोज प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। भारत की इस उपलब्धि में राजस्थान के जनजाति क्षेत्र उदयपुर संभाग की 9 महिला खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची इन बेटियों ने खेल कौशल, अनुशासन और संघर्ष की मिसाल पेश करते हुए देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। टीम में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाली कप्तान डाली गमेती समेत सुनीता मीणा, यशिष्ठा बत्रा, जुला कुमारी गुर्जर, मीरा दौजा, विशाखा मेघवाल, यशोदा गमेती, रोशनी बोस और जानवी राठौड़ शामिल रहीं।
लीग मुकाबलों में भारत ने दिखाया दम
भारतीय महिला टीम ने प्रतियोगिता की शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। टीम ने मेजबान मलेशिया को 27-3 के बड़े अंतर से हराया। इसके बाद फिलीपींस को 20-2 से शिकस्त देकर पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। कांस्य पदक के मुकाबले में भारत का सामना सिंगापुर से हुआ। रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतिम क्षणों तक शानदार खेल जारी रखा और सिंगापुर को 10-9 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।
प्रशिक्षण और टीम प्रबंधन की अहम भूमिका
खिलाड़ियों ने प्रशिक्षक नीरज बत्रा, शकील खान और मैनेजर शहजाद खान के मार्गदर्शन में बेहतर प्रदर्शन किया। चीफ डे मिशन इमरान लारी ने भी भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और टीम भावना की सराहना की। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद बेटियों ने मेहनत और अनुशासन से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उन्होंने ‘लक्ष्य ओलंपिक’ योजना के तहत खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य और खेल उन्नयन के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। राजस्थान लेक्रोज संघ सहित विभिन्न पदाधिकारियों और खेल प्रेमियों ने भी टीम को बधाई दी।
प्रेरणा बनीं जनजाति क्षेत्र की बेटियां
राजस्थान की इन 9 खिलाड़ियों की सफलता जनजाति क्षेत्र की अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणा बनी है। खिलाड़ियों ने साबित किया कि उचित प्रशिक्षण, अवसर और सहयोग मिले तो ग्रामीण एवं जनजाति क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

