हल्दीघाटी और दिवेर की विजय गाथा से नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत : शेखावत
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बोले- इतिहास नए सिरे से लिखने से ज्यादा उसके सत्य को स्मरण करने की आवश्यकता
उदयपुर, 26 सितम्बर : राष्ट्रभक्ति और मेवाड़ के शौर्य को समर्पित 10 दिवसीय दिवेर विजय महोत्सव का समापन शनिवार को प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में हुआ। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि दिवेर केवल युद्ध नहीं, बल्कि महाराणा प्रताप के पराक्रमी पुनरुत्थान और सनातन की पुनर्प्रतिष्ठा का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को हल्दीघाटी और दिवेर की विजय गाथाओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि राष्ट्र का आत्मविश्वास डगमगाए नहीं। इतिहास को नए सिरे से लिखने से अधिक उसके सत्य को पुन: स्मरण करने की आवश्यकता है।
उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने महाराणा प्रताप को स्वाभिमान का अमर प्रतीक बताते हुए कहा कि हल्दीघाटी और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को लंबे समय तक उचित स्थान नहीं मिला। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने दिवेर विजय को युगांतरकारी विजय बताते हुए कहा कि ऐसे इतिहास को पाठ्यक्रम में स्थान मिलना चाहिए।
समारोह की अध्यक्षता सिक्योर मीटर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं धरोहर न्यासी संजय सिंघल ने की। इस अवसर पर ‘दिवेर का रणघोष’ नुक्कड़ नाटक का मंचन हुआ और कलाकारों का सम्मान किया गया। पद्मिनी सभागार में कला प्रदर्शनी का उद्घाटन भी हुआ। महोत्सव के दौरान आयोजित भाषण, निबंध, रील मेकिंग, पोस्टर, फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में भीलवाड़ा के युवराज सिंह राठौड़ प्रथम, जयपुर की रिफा उरुज द्वितीय और बीकानेर की संजू कंवर रावलोत तृतीय रहीं।

