8 साल पुराने डोडाचूरा के नोटिस पर भड़के अफीम किसान
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चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट का घेराव, बोले- हर साल नष्टीकरण होता है तो पुराना डोडाचूरा कहां से लाएं
चित्तौड़गढ़, 3 अगस्त: राज्य सरकार की ओर से पिछले आठ वर्षों के डोडाचूरा के नष्टीकरण को लेकर जारी नोटिस के विरोध में सोमवार को चित्तौड़गढ़ में अफीम किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिलेभर से आए सैकड़ों किसान कॉलेज ग्राउंड से पैदल मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
किसानों का कहना था कि प्रशासन की तय प्रक्रिया के अनुसार हर वर्ष डोडाचूरा का नष्टीकरण किया जाता है। ऐसे में आठ वर्ष पुराना डोडाचूरा किसानों के पास होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने सरकार से नोटिस तत्काल वापस लेने, डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट से हटाकर आबकारी अधिनियम के तहत लाने तथा धारा 8/29 के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की।
प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रभावित रहा। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया और कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
पूर्व डेयरी चेयरमैन बद्रीलाल जाट ने कहा कि पहले डोडाचूरा का नष्टीकरण प्रशासन की मौजूदगी में होता था, जबकि बाद में किसानों को स्वयं नष्टीकरण करने की अनुमति दे दी गई। ऐसे में सरकार का आठ साल पुराने डोडाचूरा का हिसाब मांगना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसान निर्धारित समय से अधिक डोडाचूरा अपने पास रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, इसलिए यह नोटिस तर्कसंगत नहीं है।
किसानों ने डोडाचूरा के नष्टीकरण पर प्रति किलो 500 रुपए मुआवजा देने, नारकोटिक्स जांच के नाम पर कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे अफीम उत्पादक क्षेत्र में और व्यापक रूप दिया जाएगा।

