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अफीम की गुणवत्ता कम निकली, 715 किसानों से 41.90 लाख रुपए की होगी रिकवरी

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अफीम की गुणवत्ता कम निकली, 715 किसानों से 41.90 लाख रुपए की होगी रिकवरी

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चित्तौड़गढ़, 28 अप्रैल: चित्तौड़गढ़ जिले में अफीम तौल के बाद 715 किसानों को गुणवत्ता के मुकाबले अधिक भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग अब इन किसानों से कुल 41 लाख 90 हजार रुपए की रिकवरी करेगा। पहले डिवीजन के 5910 किसानों से अफीम खरीद के बाद कुल 4 करोड़ 28 लाख 60 हजार 11 रुपए का भुगतान किया गया था।
जिला अफीम अधिकारी बीएन मीणा ने बताया कि किसानों की अफीम की गुणवत्ता की फाइनल जांच रिपोर्ट आने पर पाया गया कि 715 किसानों की अफीम निर्धारित गुणवत्ता से कम थी, जबकि भुगतान अधिक कर दिया गया। ऐसे में अतिरिक्त राशि वापस ली जाएगी। विभाग जल्द ही संबंधित किसानों को राशि जमा कराने के लिए नोटिस जारी करेगा।
उन्होंने बताया कि पहले भुगतान की व्यवस्था अलग थी। किसानों को अफीम की प्रारंभिक श्रेणी के आधार पर लगभग 90 प्रतिशत भुगतान पहले कर दिया जाता था और शेष 10 प्रतिशत फाइनल रिपोर्ट आने तक रोका जाता था। यदि गुणवत्ता कम निकलती थी तो शेष राशि काट ली जाती थी। पहले जांच रिपोर्ट आने में कई महीने लगते थे, क्योंकि अफीम गाजीपुर भेजी जाती थी।
अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए अफीम को तौल के अगले ही दिन नीमच फैक्ट्री भेजा जा रहा है, जहां दो दिन के भीतर गुणवत्ता रिपोर्ट मिल जाती है। इसी कारण इस वर्ष अप्रैल से “स्टैंडर्ड कैटेगरी” का नया नियम लागू किया गया है, जिसके तहत फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
बीएन मीणा ने बताया कि मार्च में तौल शुरू होने और बजट जारी होने के कारण पहले डिवीजन में पुरानी व्यवस्था के अनुसार भुगतान किया गया था, जिससे यह अंतर सामने आया। अब जिन किसानों को अधिक राशि मिली है, उन्हें विभाग बुलाकर राशि जमा करवाएगा। यदि कोई किसान राशि जमा नहीं करता है तो तहसीलदार के माध्यम से नोटिस जारी किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस वर्ष पहले डिवीजन में 317 गांवों के 5910 किसानों से 49,002.530 किलो अफीम खरीदी गई, जिसके एवज में 4.28 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। वहीं 278 गांवों के 2101 किसानों से 1,23,550.500 किलो डोडा खरीदा गया, जिसके बदले 2 करोड़ 47 लाख 10 हजार 100 रुपए दिए गए।
विभाग के अनुसार सेकंड और थर्ड डिवीजन की गुणवत्ता रिपोर्ट अभी लंबित है। रिपोर्ट आने के बाद ही उन किसानों को अंतिम भुगतान किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत भविष्य में भुगतान पूरी तरह गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा।

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