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36 साल बाद फिर थामी कलम, 12वीं पास कर बनीं मिसाल

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36 साल बाद फिर थामी कलम, 12वीं पास कर बनीं मिसाल

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पति के निधन के बाद नहीं मानी हार, बच्चों और पोती से मिली प्रेरणा; 10वीं में 63% और 12वीं में 66% अंक हासिल कर पेश की दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल
उदयपुर, 27 जून (सुनील गोठवाल):
यह कहावत कि “सीखने की कोई उम्र नहीं होती” उदयपुर की गीता देवी प्रजापत ने सच साबित कर दी। सेवा मंदिर में कार्यरत गीता देवी ने 36 वर्ष बाद फिर से कलम उठाई और राजस्थान स्टेट ओपन बोर्ड की 12वीं परीक्षा 66 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण कर प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी सफलता उन महिलाओं के लिए भी संदेश है, जो परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं।
गीता देवी ने बताया कि वर्ष 1990 में उन्होंने नौवीं कक्षा की परीक्षा दी थी, लेकिन विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते शिक्षा अधूरी रह गई। नवंबर 2021 में पति अशोक प्रजापत के आकस्मिक निधन के बाद बच्चों और पोती पीहू को पढ़ाते-पढ़ाते उनके मन में अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने का संकल्प जागा।
बेटे शुभम, बेटी डॉ. खुशबू और बहू प्रिया के प्रोत्साहन से उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की। पहले 10वीं बोर्ड परीक्षा में 63 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और अब 12वीं में 66 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी मेहनत का प्रमाण दिया। शुभम गुड़ली की एक निजी फैक्ट्री में कार्यरत हैं, बहू प्रिया पटवारी हैं, जबकि बेटी डॉ. खुशबू कोटा से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। गीता देवी की यह उपलब्धि साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार का सहयोग हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

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