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राजसमंद सांसद महिमा कुमारी ने बाघों के पुनर्वास योजना पर जताई चिंता पारिस्थितिक संतुलन और भेड़िया संरक्षण को बताया महत्वपूर्ण

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राजसमंद सांसद महिमा कुमारी ने बाघों के पुनर्वास योजना पर जताई चिंता पारिस्थितिक संतुलन और भेड़िया संरक्षण को बताया महत्वपूर्ण

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उदयपुर, 22 जून: कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने और यहां बाघों के पुनर्वास की प्रस्तावित योजना को लेकर राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक वक्तव्य में सांसद ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले से बाघों की पर्याप्त संख्या मौजूद है, वहां से बाघों को लाकर कुंभलगढ़ में बसाने की आवश्यकता और औचित्य पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
पहले से समृद्ध वन्यजीव क्षेत्र
सांसद ने कहा कि कुंभलगढ़ अभयारण्य पहले से ही एक समृद्ध और व्यवस्थित वन क्षेत्र है, जहां तेंदुए सहित कई दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। उनका तर्क है कि सीमित क्षेत्र में बाघों को बसाने से वर्तमान पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और वन्यजीवों के बीच संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
भेड़िया संरक्षण पर भी चिंता
सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने कहा कि कुंभलगढ़ राजस्थान में भारतीय भेड़ियों के महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां भेड़ियों की स्थानीय आबादी के संरक्षण और प्रजनन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां हैं। ऐसे में यदि बाघों का पुनर्वास किया जाता है तो इसका प्रभाव भेड़ियों सहित अन्य वन्यजीव प्रजातियों पर पड़ सकता है। उन्होंने इस पहलू पर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई।
पर्यटन बनाम संरक्षण की बहस
सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि क्या टाइगर रिजर्व परियोजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण है या पर्यटन को बढ़ावा देना। उन्होंने कहा कि अभयारण्यों का मूल उद्देश्य वन्यजीवों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना होना चाहिए। यदि संरक्षण की बजाय पर्यटन प्राथमिकता बनता है तो इससे वन क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय जरूरी
सेवानिवृत्त वन्यजीव विशेषज्ञ योगेश शर्मा का मानना है कि किसी भी नए टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्वास से पहले शिकार आधार (प्रे-बेस), जल स्रोत, वन क्षेत्र की क्षमता, स्थानीय वन्यजीव आबादी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं का गहन अध्ययन आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव संस्थानों की वैज्ञानिक रिपोर्टें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
चर्चा का विषय बनी परियोजना
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व की योजना पिछले कुछ समय से मेवाड़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर इसे बाघ संरक्षण और वन्यजीव पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कुछ पर्यावरणविदों द्वारा इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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