राजसमंद की 350 साल पुरानी नौ चौकी पाल बदहाल
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नक्काशी टूटने लगी, बावड़ी में कचरा; पांच में से अब सिर्फ तीन तोरण बचे
राजसमंद, 16 अगस्त: राजसमंद झील की करीब 350 साल पुरानी नौ चौकी पाल संरक्षण के अभाव में बदहाल होती जा रही है। महाराणा राजसिंह प्रथम द्वारा बनवाई गई इस ऐतिहासिक पाल की छतरियां, बावड़ी, सीढ़ियां और संगमरमर की बारीक नक्काशी इसकी पहचान हैं, लेकिन अब कई हिस्सों में टूट-फूट दिखाई दे रही है।
कई स्थानों पर संगमरमर की सीढ़ियों के पत्थर टूटकर बाहर निकल आए हैं। इंटरलॉकिंग भी क्षतिग्रस्त है। छतरियों पर बनी देवी-देवताओं और पशु-पक्षियों की नक्काशी पर पान-गुटखे की पीक के निशान दिखाई दे रहे हैं। तीसरी छतरी के बीच स्थित ऐतिहासिक बावड़ी में प्लास्टिक की बोतलें और कचरा पड़ा है।
पाल के पांच तोरण में केवल तीन ही बचे
पाल पर पहले पांच तोरण थे, लेकिन अब केवल तीन ही बचे हैं। पुरानी संगमरमर की कलाकृतियों के अवशेष भी आसपास बिखरे हुए हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार यहां तीन मल्टी टास्किंग कर्मचारी और एक संरक्षण सहायक तैनात हैं।
अधिकारी समीर नागर ने बताया कि टूट-फूट की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर मंडल कार्यालय जोधपुर भेजा जाएगा। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने भी 12 अगस्त को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह से मुलाकात कर नौ चौकी पाल और राज प्रशस्ति शिलालेख के संरक्षण का मुद्दा उठाया था।

