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मेवाड़ में सावन, वागड़ में अभी आषाढ

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मेवाड़ में सावन, वागड़ में अभी आषाढ

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डूंगरपुर, बांसवाड़ा और गुजरात से सटे इलाकों में श्रावण की शुरुआत 15 दिन बाद, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम
उदयपुर, 3 अगस्त (सुभाष शर्मा):
राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में जैसे ही श्रावण मास शुरू होता है, शिवालयों में कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक और सावन सोमवार की धूम मच जाती है। लेकिन मेवाड़ संभाग के वागड़ अंचल—विशेषकर बांसवाड़ा, डूंगरपुर तथा गुजरात की सीमा से लगे क्षेत्रों में उस समय तक आषाढ़ मास ही चलता है। यहां श्रावण मास की शुरुआत लगभग 15 दिन बाद हरियाली अमावस्या से मानी जाती है। यही कारण है कि जब प्रदेश में सावन का तीसरा सोमवार होता है, तब वागड़ में पहला सावन सोमवार मनाया जाता है।
इस परंपरा के पीछे सबसे बड़ा कारण पंचांग गणना की अलग पद्धति है। राजस्थान के अधिकांश भागों में पूर्णिमांत पद्धति (पूर्णिमा से पूर्णिमा) के अनुसार हिंदी महीनों की गणना होती है, जबकि वागड़, गुजरात, सौराष्ट्र और महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में अमांत पद्धति (अमावस्या से अमावस्या) का पालन किया जाता है। इसी वजह से श्रावण मास की शुरुआत में लगभग 15 दिन का अंतर दिखाई देता है।
धर्माचार्यों के अनुसार वागड़ में हरियाली अमावस्या से श्रावण आरंभ मानने की परंपरा करीब 250 से 300 वर्ष पुरानी है। इस परंपरा का तीज-त्योहारों की तिथियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि पर्वों की तिथियां पूरे देश में समान रहती हैं। अंतर केवल मास की गणना का होता है।
इतिहासकार बताते हैं कि वागड़ क्षेत्र का गुजरात से सदियों पुराना सामाजिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। गुजराती भाषा, रहन-सहन, धार्मिक परंपराओं और पंचांग पद्धति का प्रभाव यहां गहराई से पड़ा। यही कारण है कि बांसवाड़ा और डूंगरपुर में आज भी गुजरात की तरह अमांत पंचांग का अनुसरण किया जाता है।
वागड़ के ख्यातनाम ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप द्विवेदी इसका एक अन्य कारण कर्क रेखा और सूर्य की गति को भी मानते हैं। उनके अनुसार गुरु पूर्णिमा के बाद सूर्य की स्थिति और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के आधार पर हरियाली अमावस्या से श्रावण का आरंभ मानने की परंपरा विकसित हुई, जो आज भी अक्षुण्ण है। हालांकि यह मान्यता धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जबकि पंचांग पद्धति का अंतर इसका प्रमुख और व्यापक रूप से स्वीकार किया जाने वाला कारण माना जाता है। वह बताते हैं कि उत्तर भारत के कई राज्यों में श्रावण मास 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा, तो वागड़, गुजरात सहित दक्षिण, पश्चिम के कई राज्यों में 13 अगस्त 2026 से शुरू होकर 11 सितंबर 2026 तक रहेगा।


15 दिन बाद शुरू होता है श्रावण मास
प्रभावित क्षेत्र:
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, गुजरात सीमा से लगे मेवाड़ के इलाके, सौराष्ट्र और गुजरात।
कारण: पूर्णिमांत और अमांत पंचांग पद्धति का अंतर।
शुरुआत: हरियाली अमावस्या से श्रावण मास का आरंभ।
परंपरा: करीब 250–300 वर्ष से प्रचलित।

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