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खुलासे के बाद भी नहीं टूटी चुप्पी, बिना टेंडर 21 निर्माण कार्यों पर उठे नए सवाल

Rajasthan

खुलासे के बाद भी नहीं टूटी चुप्पी, बिना टेंडर 21 निर्माण कार्यों पर उठे नए सवाल

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49.50 लाख के कच्चे चेकडैम में RTPP नियमों की अनदेखी के आरोप, आधा भुगतान भी जारी; अब जवाबदेही पर घिरा वन विभाग
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 8 अगस्त:
आसपुर वन रेंज में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत करीब 49.50 लाख रुपए की लागत से बनाए गए 21 कच्चे चेकडैम (एमपीटी) निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद भी वन विभाग की चुप्पी बरकरार है।
पंजाब केसरी द्वारा शुक्रवार को मामला उजागर किए जाने के बावजूद विभाग न तो यह बता पा रहा है कि बिना टेंडर निर्माण कार्य किस नियम के तहत कराए गए और न ही यह स्पष्ट कर रहा है कि लगभग आधा भुगतान किस आधार पर जारी किया गया। इस बीच सामने आए नए तथ्यों ने पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पड़ताल में सामने आया है कि इन निर्माण कार्यों में राजस्थान सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता अधिनियम (RTPP Act) के तहत अनिवार्य निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। विभागीय सूत्रों का भी कहना है कि SPPP पोर्टल पर निविदा प्रकाशित करने, ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर जी-शेड्यूल अपलोड करने और सार्वजनिक सूचना जारी करने जैसी अनिवार्य प्रक्रियाएं नहीं अपनाई गईं। इसके बावजूद सभी 21 निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए और करीब आधी राशि का भुगतान भी जारी कर दिया गया।
जब टेंडर नहीं हुए तो ठेकेदार का चयन कैसे हुआ?
मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि यदि निविदा प्रक्रिया ही नहीं अपनाई गई तो निर्माण कार्य किसे और किस आधार पर सौंपे गए? सूत्रों के अनुसार पूरा कार्य हरियाणा से बुलाए गए एक ठेकेदार से कराया गया। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें काम के लिए आवेदन या प्रतिस्पर्धा का अवसर ही नहीं मिला। उनका सवाल है कि सरकारी नियमों को दरकिनार कर बाहरी ठेकेदार को काम देने का आधार क्या था?
समितियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में वन विभाग की ओर से गठित समितियां भी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि नियमों के विपरीत समितियों का गठन किया गया और उन्हीं के माध्यम से निर्माण कार्यों का भुगतान किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अल्प शिक्षित ग्रामीणों को समिति सदस्य बनाकर पूरी प्रक्रिया संचालित की गई। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, क्योंकि मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता का भी है। मामले में उप वन संरक्षक मोहित गुप्ता से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि वे अस्पताल में हैं और फिलहाल इस विषय पर बात नहीं कर पाएंगे। समाचार लिखे जाने तक विभाग का विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

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