स्मार्ट माइनिंग से सुरक्षित और टिकाऊ खनन को मिलेगा बढ़ावा
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राष्ट्रीय संगोष्ठी में क्रिटिकल मिनरल्स और आधुनिक तकनीक पर मंथन, विद्यार्थियों को 36 हजार रुपए की छात्रवृत्ति
उदयपुर, 1 नवंबर: खनिज संसाधनों की बढ़ती मांग के बीच खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है। स्मार्ट माइनिंग के माध्यम से खनन कार्यों को अधिक सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से भारतीय खनन दिवस पर माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राजस्थान चैप्टर, उदयपुर की ओर से रविवार को लाभगढ़ रिसॉर्ट में राष्ट्रीय तकनीकी संगोष्ठी आयोजित की गई।
‘स्मार्ट माइनिंग : रिसोर्स टू रेजिलिएंस’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। भारतीय खान ब्यूरो के उत्तर क्षेत्र के खान नियंत्रक अभय अग्रवाल ने कहा कि क्रिटिकल और सामरिक खनिज आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक नियोजन जरूरी है।
खान सुरक्षा महानिदेशालय के उत्तर क्षेत्र निदेशक विनोद रजक ने परंपरागत खनन से स्मार्ट माइनिंग तक हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के निदेशक संजय सिंह ने राजस्थान की भूवैज्ञानिक संभावनाओं और सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण की जानकारी दी। खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधीक्षण खनि अभियंता डी.पी. गौड़ ने खनिज प्रशासन में डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर जोर दिया।
छात्रों को छात्रवृत्ति, सुझाव मंत्रालयों को भेजेंगे
चैप्टर अध्यक्ष महेश माथुर ने स्वागत किया। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए यश मालवीय को 21 हजार और सौम्यांशी नागदा को 15 हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी गई। तकनीकी लेख एवं निबंध प्रतियोगिता में पांच संस्थानों के 72 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। डॉ. हितांशु कौशल ने बताया कि संगोष्ठी के सुझावों का संकलन कर संबंधित राज्य एवं राष्ट्रीय विभागों और मंत्रालयों को भेजा जाएगा।

