कोटड़ा के किशोर सीख रहे हैं हर बात को कई नजरियों से समझना
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‘समझो तो’ कार्यक्रम में संविधान, तार्किक सोच और नेतृत्व विकास पर जोर, गांवों के युवाओं को बनाया जा रहा जागरूक नागरिक
सिर्फ पढ़ाई नहीं, सोच बदलने की पहल
कोटड़ा, 5 अगस्त: आदिवासी अंचल कोटड़ा में किशोरों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की अनूठी पहल की जा रही है। जनवरी 2026 से शुरू हुए ‘समझो तो’ कार्यक्रम के तहत 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को संविधान, नेतृत्व, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक मुद्दों पर तार्किक सोच विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनाना है, जो किसी भी विषय पर बिना पूर्वाग्रह के विभिन्न दृष्टिकोणों से विचार कर सकें।
कार्यक्रम के तहत आयोजित संवादात्मक सत्र में वेलाराम और नानालाल ने कहानियों की व्याख्या, टाइपोलॉजी और एकाधिक दृष्टिकोण की अवधारणा पर चर्चा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी भी घटना या जानकारी को केवल एक नजरिए से नहीं, बल्कि तथ्यों और तर्क के आधार पर परखना आवश्यक है। साथ ही भारतीय संविधान के अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लेने पर बल दिया गया। सत्र में चेतन और अवचेतन मन की कार्यप्रणाली समझाते हुए युवाओं को सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया गया। उजाला फाउंडेशन और क्षमतालय फाउंडेशन द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में आगे प्रतिभागी समुदाय स्तर पर सोशल एक्शन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से भी बदलाव की पहल करेंगे।

