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काकोरी क्रांति के 100 साल पर उदयपुर में गूंजी ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की गूंज

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काकोरी क्रांति के 100 साल पर उदयपुर में गूंजी ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की गूंज

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उदयपुर, 14 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मेवाड़ की वीर धरा पर देश के अमर क्रांतिकारियों की शौर्यगाथा जीवंत हो उठी। काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज के नए सभागार में 90 मिनट के ओजस्वी नाटक का मंचन किया गया। नाटक के दौरान ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से सभागार गूंज उठा।
प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ और सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और आरएनटी मेडिकल कॉलेज का सहयोग रहा। मंचन में अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों और क्रांतिकारियों के अदम्य साहस को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
फांसी के दृश्य ने किया भावु
नाटक में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी के बलिदान को जीवंत किया गया। मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले क्रांतिकारियों के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। काकोरी कांड से जुड़े रेल लूट के दृश्य भी मंचन का प्रमुख आकर्षण रहे।
प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने दिवेर विजय और काकोरी क्रांति की जानकारी दी। इस अवसर पर 16 से 26 सितंबर तक आयोजित होने वाले दिवेर विजय महोत्सव के पोस्टर का विमोचन किया गया।
समिति अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि देश के निर्माण और इतिहास रचने में युवा शक्ति हमेशा आगे रही है। काकोरी के बलिदानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। संयोजक मनोज जोशी ने कहा कि काकोरी क्रांति ने आजादी के आंदोलन को नई ऊर्जा दी थी और युवाओं को इन बलिदानियों के योगदान से परिचित कराना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने की। संत गुलाबदास महाराज, अमेय आत्मा कृष्ण दास, पुलिस महानिदेशक गौरव श्रीवास्तव, डॉ. रविशंकर, दीपक शुक्ल, रमन सूद और प्रो. देवेन्द्र श्रीमाली सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।
14 से 16 अगस्त तक 50 रुपए में प्रवेश
प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में 14, 15 और 16 अगस्त को पर्यटकों और आम दर्शकों के लिए विशेष छूट दी गई है। इन तीन दिनों में ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ का भ्रमण केवल 50 रुपए के प्रवेश शुल्क में किया जा सकेगा।

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