‘आदिवासी’ शब्द अंग्रेजों की देन, समाज को बांटने की राजनीति हो रही : खराड़ी
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टीएडी मंत्री का बीएपी पर निशाना, बोले- शब्दों के विवाद से नहीं, विकास से होगा जनजातीय क्षेत्रों का उत्थान
डूंगरपुर, 12 जून: जनजातीय क्षेत्रीय विकास (टीएडी) मंत्री एवं डूंगरपुर जिले के प्रभारी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने ‘आदिवासी’ और ‘वनवासी’ शब्दों को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा बयान देते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने और भ्रम फैलाने के लिए कुछ लोग शब्दों के नाम पर विवाद खड़ा कर रहे हैं, जबकि जनजातीय समाज का वास्तविक विकास ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खराड़ी ने कहा कि वन में रहने वाले को वनवासी और शहर में रहने वाले को शहरवासी कहा जाता है, ऐसे में शब्दों को लेकर विवाद खड़ा करना केवल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ‘आदिवासी’ शब्द अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1930 के आसपास प्रचलन में लाया गया, जबकि उससे पहले भील और जनजाति जैसे शब्दों का उपयोग होता था।
खराड़ी ने कहा कि देश को कमजोर करने वाली ताकतें समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं और कुछ लोग उनके प्रभाव में आकर इस तरह के मुद्दों को हवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को विवादों में उलझाने के बजाय शिक्षा, रोजगार और विकास पर ध्यान देना चाहिए।
