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उम्र का अनुभव ही विरासत का असली संरक्षण: प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ की मासिक बैठक में मंथन

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उम्र का अनुभव ही विरासत का असली संरक्षण: प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ की मासिक बैठक में मंथन

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उदयपुर, 27 अप्रैल:
विज्ञान समिति के प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ की मासिक बैठक में “उम्र का योगदान: विरासत का संरक्षण” विषय पर सारगर्भित चर्चा हुई, जिसमें वक्ताओं ने पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर विरासत को बचाने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में इंजीनियर गौरव सिंघवी ने कहा कि विरासत का संरक्षण घर से शुरू होता है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
परंपराओं को जीवनशैली से जोड़ने पर जोर
उन्होंने कहा कि बच्चों को त्योहार, भाषा, खान-पान, रहन-सहन और पारंपरिक पहनावे से जोड़ना जरूरी है। बुजुर्गों को चाहिए कि वे अपने अनुभवों को कहानियों और लोकगीतों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाएं, जिससे सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव मजबूत हो सके।
आधुनिकता और संस्कृति में संतुलन जरूरी
बैठक में यह भी बताया गया कि आधुनिक जीवनशैली अपनाते हुए भी अपनी संस्कृति और विरासत के मूल तत्वों को बचाए रखना आवश्यक है। परिवार के वरिष्ठ सदस्य बच्चों को संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजी. आर. के. चतुर्वेदी ने की, जबकि वार्ताकार का परिचय डॉ. के. पी. तलेसरा ने दिया। संयोजन मुनीश गोयल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. के. गर्ग द्वारा किया गया।
बैठक में डॉ. के. एल. कोठारी, डॉ. के. एल. तोतावत, शांतिलाल भंडारी, इंजी. एस. सी. के. वैद्य, डॉ. बी. एल. चावला, डॉ. सुजान सिंह और इंजी. आर. के. खोखवट सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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