तीन दिवसीय ‘एंब्रियोलॉजी इसार 2026’ राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
Share
एम्ब्रायो ट्रांसफर, मेल इनफर्टिलिटी और जेनेटिक्स पर 9 कार्यशालाएं; 400 से अधिक विशेषज्ञ ले रहे भाग
उदयपुर, 18 सितंबर: इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (इसार) के तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘एंब्रियोलॉजी इसार 2026’ शुक्रवार से होटल मैरियट में शुरू हुआ। ‘पर्लरू प्रोग्रेस इन एंब्रियोलॉजी-एडवांसेज, रिसर्च एंड लर्निंग’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में एम्ब्रियोलॉजी, फर्टिलिटी और असिस्टेड रिप्रोडक्शन से जुड़े देश-विदेश के 400 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन 20 सितंबर तक चलेगा।
इसार की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीता तांदुलवाडकर ने बताया कि पहले दिन सुबह 9 बजे से नौ प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें भ्रूण संवर्धन प्रणाली, ओवेरियन स्टिमुलेशन से एम्ब्रायो ट्रांसफर की मास्टरक्लास, मेल इनफर्टिलिटी, प्री-आईवीएफ वर्कअप, एआरटी में जेनेटिक्स तथा नए एआरटी और सरोगेसी कानूनों की कानूनी पेचीदगियों पर सत्र हुए।
कार्यशालाओं में अत्याधुनिक विट्रिफिकेशन, माइक्रोमैनिप्युलेशन आधारित आईसीएसआई और एम्ब्रायो बायोप्सी पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को लेजर तकनीक, ट्यूबिंग, माइक्रोडिसेक्शन और सिमुलेटर पर लाइव ट्रेनिंग दी गई।
इसार एम्ब्रियोलॉजी कमेटी के चेयरपर्सन डॉ. केशव मल्होत्रा ने कहा कि एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में तकनीकी विकास तेजी से हुआ है। लैब में उच्च गुणवत्ता वाले कार्य को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और नई तकनीकों से अपडेट रहना जरूरी है। इसार सचिव डॉ. आशीष काले ने सम्मेलन को चिकित्सकों और एम्ब्रियोलॉजिस्ट के लिए शिक्षा, कौशल विकास और उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में संगठन की प्रतिबद्धता बताया।
आयोजन सचिव डॉ. मनीषा वाजपेयी ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य भ्रूण विज्ञान में हो रही प्रगति, आधुनिक तकनीकों, नए शोध और असिस्टेड रिप्रोडक्शन में विकसित हो रही उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों के बीच वैज्ञानिक संवाद स्थापित करना है। सम्मेलन के माध्यम से विज्ञान, लैब विशेषज्ञता और क्लीनिकल अनुभव को एक मंच पर लाकर तकनीकों को बेहतर बनाने तथा एआरटी प्रैक्टिस के मानकों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

