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जनजातीय कला हमारी सांस्कृतिक विरासत का अनमोल खजाना : संभागीय आयुक्त

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जनजातीय कला हमारी सांस्कृतिक विरासत का अनमोल खजाना : संभागीय आयुक्त

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तीन दिवसीय प्रदर्शनी का समापन, सात जिलों के 35 से अधिक कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा
उदयपुर, 16 अक्टूबर:
भील जनजाति की पारंपरिक चित्रकला और कलाकृतियों में लोकजीवन, प्रकृति और सांस्कृतिक परंपराओं की अनूठी झलक देखने को मिली। चेतक सर्कल स्थित सूचना केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय चित्रकला एवं कलाकृति प्रदर्शनी का शुक्रवार को समापन हुआ। संभागीय आयुक्त खजानसिंह ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कलाकारों की सृजनशीलता की सराहना की।
माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) की ओर से जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में उन्होंने कहा कि जनजातीय कला समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यशालाओं तथा प्रदर्शनियों को निरंतर प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन ने बताया कि 9 से 13 अक्टूबर तक आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, बालोतरा और सिरोही के 35 से अधिक भील कलाकारों ने भाग लिया। कार्यशाला में तैयार कलाकृतियां प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गईं।

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