412 भूखंड घोटाला: एसओजी की गिरफ्त में दंपती, पुराने बयान से उठे नए सवाल
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निरंजन मोगरा ने तत्कालीन निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहट पर लगाए गंभीर आरोप; खुद को बताया ‘बलि का बकरा’
उदयपुर, 8 अगस्त : उदयपुर के बहुचर्चित 412 भूखंड घोटाले की जांच में एसओजी की कार्रवाई के बाद मामले में नए सवाल खड़े हो गए हैं। एसओजी ने सरकारी अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को करोड़ों रुपए के कथित भूखंड घोटाले में आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया है। इसी बीच एसओजी को दिए गए निरंजन मोंगरा के पुराने बयान सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए तत्कालीन नगर निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहट पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मोगरा के बयान के अनुसार, वर्ष 2016 में बारहट के नगर निगम आयुक्त बनने के बाद दोनों के बीच नजदीकी थी। मोगरा ने दावा किया कि बारहट ने ही हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित भूखंड संख्या 412 को खरीदने का सुझाव दिया था। उनके अनुसार, भूखंड से संबंधित दस्तावेज भी बारहट ने ही उपलब्ध करवाए थे।
मोगरा ने बताया कि इसके बाद उन्होंने पंडित महावीर शरण से उक्त भूखंड 39.25 लाख रुपए में खरीदा। बाद में भूखंड का नामांतरण हुआ और भवन निर्माण की अनुमति भी जारी की गई। हालांकि, बाद में नगर निगम की ओर से दस्तावेजों को संदिग्ध मानकर कार्रवाई शुरू की गई।
अपने बयान में मोगरा ने तत्कालीन आयुक्त पर धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप लगाते हुए खुद को मामले में ‘बलि का बकरा’ बनाए जाने का दावा किया है। वहीं, एसओजी की जांच में हेमलता कांकरिया और मोगरा की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि 412 भूखंडों से जुड़े इस कथित करोड़ों के खेल के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसकी पूरी कड़ी आखिर कहां तक जाती है।

