सज्जनगढ़ ESZ पर बड़ा सवाल: पहले शहर का हिस्सा, फिर पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र
Share
मास्टर प्लान में आबादी यथावत और नियंत्रित पर्यटन की अनुमति, अब 18 गांवों के ग्रामीणों में नोटिसों को लेकर चिंता
उदयपुर, 24 अगस्त: सज्जनगढ़ क्षेत्र के ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को लेकर पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आबादी के अधिकारों के बीच संतुलन का सवाल खड़ा हो गया है। जिस क्षेत्र को सरकार वर्ष 1972 से उदयपुर के नगरीय क्षेत्र का हिस्सा मानती रही, उसी क्षेत्र को बाद में ESZ के दायरे में लाकर प्रतिबंधित गतिविधियों के अधीन कर दिया गया। स्थानीय पक्ष का कहना है कि उदयपुर मास्टर प्लान 2011-2031 में इसी क्षेत्र में आबादी यथावत रखने और पर्यावरणीय शर्तों के साथ नियंत्रित विकास की व्यवस्था है।
मास्टर प्लान में रिसॉर्ट और आबादी विस्तार तक का प्रावधान
मास्टर प्लान के पेज 65-66 के अनुसार सज्जनगढ़ अभयारण्य के चारों ओर 100 मीटर अथवा वन विभाग द्वारा निर्धारित पट्टी को ग्रीन-1 में रखकर निर्माण निषेध किया गया है। वहीं ग्रीन-2 में रिसॉर्ट, फार्म हाउस, एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क आदि गतिविधियां पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप अनुज्ञेय हैं। इसमें राजस्व ग्रामों की आबादी यथावत रखने और आबादी विस्तार की अनुमति का भी उल्लेख है।
5.19 वर्ग किमी अभयारण्य के मुकाबले 29.8 वर्ग किमी ESZ
स्थानीय दस्तावेजों के अनुसार सज्जनगढ़ अभयारण्य 5.19 वर्ग किमी है, जबकि ESZ करीब 29.8 वर्ग किमी बताया गया है। यानी ESZ अभयारण्य से करीब 5.74 गुना बड़ा है। इसी अनुपात को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
9 से 18 गांवों तक पहुंचा दायरा
दावा है कि अधिसूचना में 9 गांवों का उल्लेख था, जबकि राजस्व नक्शे पर जोनल मास्टर प्लान के सुपरइम्पोज होने पर 18 गांव आंशिक या पूर्ण रूप से दायरे में आ रहे हैं। ग्रामीण नोटिस और निर्माण संबंधी कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं।
स्थानीय पक्ष का कहना है कि ESZ का उद्देश्य विकास रोकना नहीं, बल्कि संरक्षण और स्थानीय आजीविका में संतुलन बनाना है। नाहरगढ़ और मुकुंदरा जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए सज्जनगढ़ ESZ की सीमा, पुराने मास्टर प्लान और आबादी को ध्यान में रखकर पुनर्समीक्षा की मांग उठ रही है।
5.19 वर्ग किमी अभयारण्य के चारों ओर 29.8 वर्ग किमी क्षेत्र क्यों?
मॉनिटरिंग कमेटी को ज्ञापन, 18 गांवों के आबादी क्षेत्र प्रभावित होने का दावा; सीमा न्यूनतम करने की मांग
सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की सीमा को लेकर स्थानीय रहवासियों ने सवाल उठाते हुए मॉनिटरिंग कमेटी और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में दावा किया गया कि 5.19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले अभयारण्य के मुकाबले ESZ करीब 29.8 वर्ग किलोमीटर है, जो अभयारण्य से लगभग 5.74 गुना अधिक है। इसे स्थानीय आबादी की जरूरतों को देखते हुए न्यूनतम करने की मांग की गई।
18 गांवों के प्रभावित होने का दावा
पर्यावरणविद् डॉ. महेश शर्मा के अनुसार पहले ESZ अधिसूचना में 9 गांवों का उल्लेख था, लेकिन राजस्व नक्शे को जोनल मास्टर प्लान पर सुपरइम्पोज करने पर 18 गांव आंशिक या पूर्ण रूप से इसके दायरे में आ रहे हैं। इससे आवास, व्यवसाय और निर्माण गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में चिंता है।
मास्टर प्लान से विरोधाभास का सवाल
उदयपुर मास्टर प्लान 2011-2031 का हवाला देते हुए कहा गया कि ग्रीन-2 क्षेत्र में रिसॉर्ट, फार्म हाउस, एम्यूजमेंट पार्क और वाटर पार्क जैसी गतिविधियां पर्यावरणीय मानकों के साथ अनुमत हैं तथा राजस्व ग्रामों की आबादी यथावत रखने का प्रावधान है। कुंभलगढ़, मुकुंदरा और नाहरगढ़ के उदाहरण देते हुए स्थानीय पक्ष ने ESZ सीमा के पुनर्मूल्यांकन की मांग की। साथ ही होटल-रिसॉर्ट को पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियंत्रित गतिविधि मानकर पर्यावरण और रोजगार के बीच संतुलन बनाने की मांग की गई।

