मनरेगा में बदलाव के विरोध में सीटू का प्रदर्शन
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राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, ग्रामीणों को 200 दिन रोजगार और 600 रुपये मजदूरी की मांग
उदयपुर, 1 जुलाई: मनरेगा की जगह प्रस्तावित नए कानून का विरोध करते हुए भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने बुधवार को जिला कलक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। सीटू ने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी ग्रामीण आजीविका योजना को कमजोर करने का प्रयास लाखों गरीब परिवारों के हितों के खिलाफ है। संगठन ने मनरेगा को यथावत जारी रखने और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
सीटू जिलाध्यक्ष राजेश सिंघवी ने कहा कि नए कानून में 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार देने की बात कही जा रही है, लेकिन वित्तीय भागीदारी में बदलाव से राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने केवाईसी, ऑनलाइन उपस्थिति और तकनीकी प्रक्रियाओं को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे मजदूरों को रोजगार मिलने में कठिनाई होगी। उन्होंने पंचायतों की भूमिका कम किए जाने पर भी आपत्ति जताई। ज्ञापन में मनरेगा को जारी रखते हुए वर्ष में 200 दिन रोजगार और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की गई। इस दौरान हीरालाल सालवी, शमशेर खान, दामोदर कुमावत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
