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लेकसिटी में नहीं लगाए जाएं कोनोकार्पस, दिया जाए देशी प्रजातियों को बढ़ावा

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लेकसिटी में नहीं लगाए जाएं कोनोकार्पस, दिया जाए देशी प्रजातियों को बढ़ावा

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पूर्व पार्षद—अधिवक्ता डॉ. विजय विप्लवी का सुझाव कोनोकार्पस के पूर्व में लगाए पेड़ों को चरणबद्ध हटाया जाए
उदयपुर, 9 जुलाई:
उदयपुर में कोनोकार्पस वृक्षों के नए रोपण पर तत्काल रोक लगाने तथा पहले से लगाए गए वृक्षों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की मांग उठी है। इस संबंध में अधिवक्ता एवं पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने आवाज उठाई है।
डॉ. विप्लवी का कहना है कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य संस्थाओं द्वारा पिछले कुछ वर्षों में शहर की सड़कों, डिवाइडरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में कोनोकार्पस वृक्ष लगाए गए हैं। हालांकि, अब इनके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ज्ञापन में गुजरात सरकार द्वारा वर्ष 2023 में कोनोकार्पस के नए रोपण पर प्रतिबंध लगाने का भी उल्लेख किया गया है।
डॉ. विजय विप्लवी ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार कोनोकार्पस की जड़ें अत्यधिक फैलाव वाली होती हैं, जिससे पेयजल पाइपलाइन, सीवरेज लाइन, भूमिगत केबल, भवनों की नींव और सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसके अलावा परागकणों से एलर्जी, अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य के वृक्षारोपण कार्यक्रमों में नीम, पीपल, बरगद, खेजड़ी और अन्य देशी एवं पर्यावरण हितैषी प्रजातियों को प्राथमिकता देने की मांग की।

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